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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla: NHAI asked to respond regarding damage caused to a building due to four-lane construction work

शिमला: फोरलेन निर्माण कार्य से भवन को हुए नुकसान पर एनएचएआई से जवाब तलब, जानें पूरा मामला

Fri, 25 Sep 2026 09:33 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Sep 2026 09:33 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने संजौली के चलौंठी में फोरलेन निर्माण के कारण मकान को हुए नुकसान के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से जवाब तलब किया है।

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Shimla: NHAI asked to respond regarding damage caused to a building due to four-lane construction work
अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने संजौली के चलौंठी में फोरलेन निर्माण के कारण मकान को हुए नुकसान के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से जवाब तलब किया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधवालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। मामले के अनुसार संजौली के चलौंठी (वर्मा निवास) की रहने वाली बुजुर्ग विधवा देवकी देवी ने कोर्ट में अपनी शिकायत सौंपी है। शिकायत में बताया कि एनएचएआई के ठेकेदार मैसर्स गाॅवर शिमला हाईवे प्राइवेट लिमिटेड की ओर से किए जा रहे फोरलेन निर्माण कार्य के कारण उनका मकान पूरी तरह असुरक्षित हो गया है और उन्हें घर छोड़ना पड़ा है। कोर्ट ने इस प्रतिवेदन की प्रति एनएचएआई को सौंपते हुए इस पर जवाब दाखिल करने को कहा है। प्रभावित देवकी देवी ने अपनी अर्जी में प्रशासन और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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मकान के नुकसान का आकलन 28.22 लाख था
प्रार्थी का आरोप है कि हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग ने तकनीकी मूल्यांकन के बाद उनके मकान के नुकसान का आकलन 28.22 लाख रुपये किया था। लेकिन एनएचएआई ने इसे मनमाने ढंग से घटाकर महज 5.49 लाख रुपये कर दिया जो मरम्मत के लिए नाकाफी है। मकान की वास्तविक बाजार कीमत लगभग 44.78 लाख रुपये है। मकान असुरक्षित होने के कारण उनके किरायेदारों ने घर खाली कर दिया जिससे उन्हें पिछले दो वर्षों में करीब 12 लाख रुपये के किराये का नुकसान 50 हजार रुपये प्रतिमाह हुआ है। प्रार्थी का आरोप है कि कंपनी की ओर से बिना किसी अधिग्रहण के उनकी निजी जमीन पर निर्माण का मलबा फेंक दिया है। साथ ही गांव के लोगों के लिए रास्ता न बनाए जाने के कारण सैकड़ों लोग उनके घर के आगे की निजी जमीन का इस्तेमाल रास्ते के तौर पर कर रहे हैं। अदालत ने इन सभी मुद्दों को संज्ञान में लेते हुए एनएचएआई को जवाब दाखिल करने की मोहलत दी है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

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दूसरे मामले में 1.11 करोड़ रुपये जमा
एक अन्य मामले में अदालत के आदेशानुसार रजिस्ट्री ने सूचित किया कि एनएचएआई की ओर से 5 अगस्त 2026 के अदालती आदेशों का पालन करते हुए 1,11,77,962 रुपये (1.11 करोड़ रुपये) की राशि जमा कर दी है। यह राशि क्षतिपूर्ति के रूप में तय की गई कुल राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा है। अदालत ने प्रतिवादी ठेकेदार कंपनी को निर्देश दिया है कि वह भी अपने हिस्से की राशि आगामी सुनवाई की तिथि तक अनिवार्य रूप से जमा करवाए। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया कि प्रभावित रंजना देवी की ओर से कोई उपस्थित नहीं था लेकिन उन्होंने समान राहत के लिए एक अलग याचिका दायर की है। अदालत ने प्रशासनिक कार्यालय को दोनों याचिकाओं को एक साथ करने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार ने पीठ को अवगत कराया कि 5 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में प्रभावित चंदा देवी के मकान के मूल्य का आकलन कर लिया है। अदालत ने कार्यालय को इस संबंध में दायर हलफनामे को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

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