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सरकारी स्कूलों के लिए चलें अतिरिक्त बसें
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अभिभावकों के आग्रह के बावजूद नहीं मिली राहत
हर रोज बसों का पौना घंटा करना पड़ता है इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में स्कूल जाते और वापस घर लौटते वक्त बेटियां ओवरलोड बसों में सफर करने को मजबूर हैं। भीड़ वाली बसों में इन बेटियों से कई बार छेड़खानी की घटनाएं भी हो चुकी हैैं। छेड़खानी का मामला छात्राओं ने पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में भी उठाया था। बात सरकार तक अभिभावक पहले ही पहुंचा चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
राजधानी शिमला में सबसे अधिक छात्राओं की संख्या वाले कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पोर्टमोर की छात्राओं को भी टॉलैंड और हिमलैंड बस स्टॉप पर बसें नहीं मिलती। इससे अभिभावक खफा हैं। इस स्कूल में 1721 छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं।
सुबह स्कूल आने और छुट्टी के बाद घर लौटने के लिए छात्राओं को ओवरलोड बसों में सफर करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने एचआरटीसी से आग्रह किया है कि सुबह स्कूल खुलने और दोपहर बाद स्कूल से छुट्टी के वक्त अतिरिक्त बसें चलाई जाएं। छात्राओं को कई बार खाली बस के इंतजार में पौना घंटा लग जाता है। सरकार ने सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को मुफ्त बस सेवा की सुविधा दे रखी है लेकिन इसका छात्राओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा।
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पांच बसें अतिरिक्त चलाई जाएं : अध्यक्ष
पोर्टमोर स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एमके भारद्वाज ने बताया कि समिति, परिवहन मंत्री से मुलाकात कर पोर्टमोर स्कूल की छात्राओं के लिए अतिरिक्त बसें चलाने की मांग को उठाएगी। कहा कि पंथाघाटी, न्यू शिमला, संजौली, ढली और पुराने बस अड्डे की तरफ स्कूल के समय पांच अतिरिक्त बसें चलाई जाएं।
भीड़ होने से बस में नहीं चढ़ पाती हैं छात्राएं
पोर्टमोर स्कूल के एसएसमसी सदस्य खेमदत्त शर्मा ने कहा कि सुबह और शाम दोनों समय बसों में भीड़ होने से छात्राएं बस में नहीं चढ़ पातीं। कई बार छात्राओं को टॉलैंड से लेकर न्यू शिमला तक पैदल आना पड़ता है। अभिभावक चेतराम शर्मा ने कहा कि यह सैकड़ों बेटियों से जुड़ी रोज की समस्या है। इसे सरकार समझे और छात्राओं के सुरक्षित सफर के लिए अतिरिक्त बसें चलाएं।
सीएम ने दिए थे अतिरिक्त बसें चलाने के आदेश : सूद
पोर्टमोर स्कूल के प्रधानाचार्य नरेंद्र सूद ने कहा कि छात्राओं की बस की समस्या को एसएमसी ने मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री के समक्ष उठाया है। मुख्यमंत्री ने इस पर परिवहन निगम को इस समस्या के समाधान के आदेश दिए थे लेकिन अभी तक छात्राओं की सुविधा के लिए स्कूल समय में अतिरिक्त बसें चलना शुरू नहीं हुई हैं।
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हर रोज बसों का पौना घंटा करना पड़ता है इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। शहर में स्कूल जाते और वापस घर लौटते वक्त बेटियां ओवरलोड बसों में सफर करने को मजबूर हैं। भीड़ वाली बसों में इन बेटियों से कई बार छेड़खानी की घटनाएं भी हो चुकी हैैं। छेड़खानी का मामला छात्राओं ने पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में भी उठाया था। बात सरकार तक अभिभावक पहले ही पहुंचा चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।
राजधानी शिमला में सबसे अधिक छात्राओं की संख्या वाले कन्या वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल पोर्टमोर की छात्राओं को भी टॉलैंड और हिमलैंड बस स्टॉप पर बसें नहीं मिलती। इससे अभिभावक खफा हैं। इस स्कूल में 1721 छात्राएं शिक्षा ग्रहण करती हैं।
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सुबह स्कूल आने और छुट्टी के बाद घर लौटने के लिए छात्राओं को ओवरलोड बसों में सफर करना पड़ रहा है। अभिभावकों ने एचआरटीसी से आग्रह किया है कि सुबह स्कूल खुलने और दोपहर बाद स्कूल से छुट्टी के वक्त अतिरिक्त बसें चलाई जाएं। छात्राओं को कई बार खाली बस के इंतजार में पौना घंटा लग जाता है। सरकार ने सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को मुफ्त बस सेवा की सुविधा दे रखी है लेकिन इसका छात्राओं को कोई लाभ नहीं मिल रहा।
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पांच बसें अतिरिक्त चलाई जाएं : अध्यक्ष
पोर्टमोर स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एमके भारद्वाज ने बताया कि समिति, परिवहन मंत्री से मुलाकात कर पोर्टमोर स्कूल की छात्राओं के लिए अतिरिक्त बसें चलाने की मांग को उठाएगी। कहा कि पंथाघाटी, न्यू शिमला, संजौली, ढली और पुराने बस अड्डे की तरफ स्कूल के समय पांच अतिरिक्त बसें चलाई जाएं।
भीड़ होने से बस में नहीं चढ़ पाती हैं छात्राएं
पोर्टमोर स्कूल के एसएसमसी सदस्य खेमदत्त शर्मा ने कहा कि सुबह और शाम दोनों समय बसों में भीड़ होने से छात्राएं बस में नहीं चढ़ पातीं। कई बार छात्राओं को टॉलैंड से लेकर न्यू शिमला तक पैदल आना पड़ता है। अभिभावक चेतराम शर्मा ने कहा कि यह सैकड़ों बेटियों से जुड़ी रोज की समस्या है। इसे सरकार समझे और छात्राओं के सुरक्षित सफर के लिए अतिरिक्त बसें चलाएं।
सीएम ने दिए थे अतिरिक्त बसें चलाने के आदेश : सूद
पोर्टमोर स्कूल के प्रधानाचार्य नरेंद्र सूद ने कहा कि छात्राओं की बस की समस्या को एसएमसी ने मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री के समक्ष उठाया है। मुख्यमंत्री ने इस पर परिवहन निगम को इस समस्या के समाधान के आदेश दिए थे लेकिन अभी तक छात्राओं की सुविधा के लिए स्कूल समय में अतिरिक्त बसें चलना शुरू नहीं हुई हैं।