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शहर में मंदिरों के चढ़ावे पर मचा घमासान, जांच करने पहुंचीं एसडीएम से नोकझोंक

Thu, 04 Oct 2018 01:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 04 Oct 2018 01:24 PM IST
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People argument with SDM Shimla Neeraj Chandla

सनातन धर्म प्रबंधक कमेटी संजौली के तहत आने वाले ढींगू और लक्ष्मी नारायण मंदिर के चढ़ावे तथा जंजघर से होने वाली कमाई को लेकर खूब घमासान हुआ। एसडीएम शहरी शिकायत मिलने के बाद वस्तुस्थिति जानने के लिए टीम के साथ मौके पर पहुंचीं और कमेटी के सदस्यों से रिकार्ड मांगा। इस दौरान कमेटी के अध्यक्ष और एसडीएम के बीच तीखी नोंक झोंक हो गई। मामला इतना बिगड़ गया कि मौके पर पुलिस को बुलाना पड़ा। 

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एसडीएम नीरज चांदला ने कहा कि मंदिर में मौजूद कमेटी के पदाधिकारी रिकार्ड मौके पर नहीं दिखा पाए। कहा कि कमेटी न तो जनरल हाउस बुलाती है न ही पांच साल से इसके चुनाव हुए हैं। वहीं कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि बिना नोटिस के एकदम से एसडीएम टीम के साथ पहुंच गई। मौके पर उनके पास जितने दस्तावेज थे सब दिखाए हैं।
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शेष दस्तावेज सोमवार को कार्यालय में दिखा दिए जाएंगे। उन्होंने एसडीएम के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार करने से इंकार किया। कहा कि संस्था पर लगाए आरोप गलत हैं। सभा गलत काम कर रही है तो प्रशासन इसे साबित करें और मंदिरों को अपने अधीन ले लें। दूसरी तरफ प्रशासन मंदिरों को सरकार के अधीन लेने की तैयारी कर चुका है।

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कमेटी नहीं दिखा पाई रिकार्ड : एसडीएम

People argument with SDM Shimla Neeraj Chandla

एसडीएम शहरी नीरज चांदला एक शिकायत मिलने के बाद मंदिर पहुंची थीं। एसडीएम के मुताबिक इस शिकायत पत्र पर करीब 40 महिलाओं के हस्ताक्षर हैं। कमेटी पर पैसों का हिसाब किताब नहीं रखने, मंदिर में महिलाओं को भजन कीर्तन करने से रोकने के आरोप लगाए हैं। शिकायत को आधार बनाकर बुधवार शाम करीब छह बजे एसडीएम टीम के साथ लक्ष्मी नारायण मंदिर पहुंचीं।

कमेटी के सदस्यों से रिकार्ड मांगा। इसी पर दोनों पक्षों में तीखी नोंकझोंक हो गई। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि इस समय सारा रिकार्ड कहां से लाएं, अभी दुकानें छोड़ कर यहां आए हैं। हालांकि मौखिक तौर पर उन्होंने कहा कि इन मंदिरों और जंजघर से सालाना करीब 60 लाख तक की रकम जुटती है। यहां से मिलने वाला पैसा मंदिरों के विकास कार्यों पर खर्च होता है। 

एसडीएम नीरज चांदला ने कहा कि शिकायत मिली थी कि मंदिरों और जंजघर को मिलने वाला पैसा कहां खर्चा जाता है इसका कोई रिकार्ड नहीं होता। महिलाओं को भजन कीर्तन करने नहीं करने दिया जाता। मौके पर पदाधिकारी कोई ठोस रिकार्ड नहीं दिखा पाए उल्टा उलझने लगे। मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी उन्हें कमेटी की ओर से मौखिक तौर पर बताया कि करीब सालाना 60 लाख की रकम जुट जाती है। मंदिरों को सरकार के अधीन लेने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।

सनातन धर्म प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अश्वनी सूद ने कहा कि बिना नोटिस दिए प्रशासन की टीम शाम छह बजे मौके पर पहुंची तब भी वह दुकानें छोड़ कर आएं। उन्हें मौके पर जितने दस्तावेज थे वह दिखाए गए बाकी रिकार्ड सोमवार को उनके कार्यालय में दिखाया जाएगा। पैसों का इस्तेमाल मंदिरों के विकास के लिए किया जा रहा है यह सभी जानते हैं। ढींगू मंदिर में काम चल रहा है। दो तीन महिलाओं की शिकायत पर यह किया गया। कमेटी पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद है।

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