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Shimla News: मरीजों को घंटों लाइन में ही रहना पड़ा खड़ा
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आईजीएमसी में दिनभर परेशान रहे लोग
डॉक्टर तक पहुंचने में लग गए चार घंटे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में सोमवार को ओपीडी में भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह 9 बजे से ही अस्पताल के विभिन्न विभागों के बाहर मरीजों की कतारें लगनी शुरू हो गईं जो दोपहर तक लंबी होती चली गईं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कई मरीजों और उनके परिजनों को जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मेडिसिन, हड्डी रोग, त्वचा और नेत्र रोग ओपीडी के बाहर सबसे अधिक भीड़ रही। मरीजों ने बताया कि उन्हें पर्ची बनने से लेकर डॉक्टर से मिलने तक में 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
कई मरीज ऐसे भी थे जो दूरदराज से आए थे और उन्हें दिनभर का सफर कर आने के बाद अस्पताल की लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। रामपुर से आए नारायण दत्त ने बताया कि उन्हें घुटनों में दर्द की शिकायत है, लेकिन डॉक्टर से मिलने के लिए उन्हें करीब दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। ठियोग से आई विमला देवी अपने पति को दिखाने आई थीं जिन्हें श्वास संबंधी समस्या है। उन्होंने कहा सुबह 6 बजे घर से निकले थे आईजीएमसी पहुंचने के बाद भी घंटों तक लाइन में लगना पड़ा।
रोहड़ू निवासी 30 वर्षीय संजय ठाकुर को त्वचा संबंधी परेशानी थी। कहा कि इतनी भीड़ में समझ नहीं आ रहा था कि किस काउंटर पर जाना है। न तो कोई गाइड करने वाला था और न ही बैठने की व्यवस्था। भीड़ की वजह से अस्पताल के गलियारों में भी मरीज और उनके परिजन फर्श पर बैठे दिखाई दिए। हर सोमवार को इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है, लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। मरीजों ने मांग की है कि अस्पताल में भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए, बैठने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। नंबर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुचारु बनाया जाए।
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डॉक्टर तक पहुंचने में लग गए चार घंटे
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला में सोमवार को ओपीडी में भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह 9 बजे से ही अस्पताल के विभिन्न विभागों के बाहर मरीजों की कतारें लगनी शुरू हो गईं जो दोपहर तक लंबी होती चली गईं। बैठने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कई मरीजों और उनके परिजनों को जमीन पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। मेडिसिन, हड्डी रोग, त्वचा और नेत्र रोग ओपीडी के बाहर सबसे अधिक भीड़ रही। मरीजों ने बताया कि उन्हें पर्ची बनने से लेकर डॉक्टर से मिलने तक में 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
कई मरीज ऐसे भी थे जो दूरदराज से आए थे और उन्हें दिनभर का सफर कर आने के बाद अस्पताल की लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ा। रामपुर से आए नारायण दत्त ने बताया कि उन्हें घुटनों में दर्द की शिकायत है, लेकिन डॉक्टर से मिलने के लिए उन्हें करीब दो घंटे तक लाइन में खड़ा रहना पड़ा। ठियोग से आई विमला देवी अपने पति को दिखाने आई थीं जिन्हें श्वास संबंधी समस्या है। उन्होंने कहा सुबह 6 बजे घर से निकले थे आईजीएमसी पहुंचने के बाद भी घंटों तक लाइन में लगना पड़ा।
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रोहड़ू निवासी 30 वर्षीय संजय ठाकुर को त्वचा संबंधी परेशानी थी। कहा कि इतनी भीड़ में समझ नहीं आ रहा था कि किस काउंटर पर जाना है। न तो कोई गाइड करने वाला था और न ही बैठने की व्यवस्था। भीड़ की वजह से अस्पताल के गलियारों में भी मरीज और उनके परिजन फर्श पर बैठे दिखाई दिए। हर सोमवार को इस तरह की स्थिति देखने को मिलती है, लेकिन इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। मरीजों ने मांग की है कि अस्पताल में भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती की जाए, बैठने की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध करवाई जाए। नंबर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुचारु बनाया जाए।
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