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Shimla News: आपराधिक मामले पेंडिंग होने पर भी रिन्यू हो सकेगा पासपोर्ट
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शिमला। आपराधिक मामलों का सामना कर रहे आरोपियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। शिमला की अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल आपराधिक मामला लंबित होने मात्र से किसी व्यक्ति के पासपोर्ट को 10 साल की सामान्य अवधि के लिए रिन्यू करने से इन्कार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि पासपोर्ट का वैध दस्तावेज होना और वास्तव में विदेश यात्रा करना, दोनों अलग-अलग विषय हैं।
न्यायिक मजिस्ट्रेट सिमरन की अदालत ने याची यतिश चंद्र सूद की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। याची यतिश चंद्र सूद ने अपने पासपोर्ट जो मार्च 2027 तक वैध है को अगले 10 साल के लिए रिन्यू करवाने की अनुमति मांगी थी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने लंबित आपराधिक मामले के चलते कोर्ट से एनओसी (अनुमति) लाने को कहा था। राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि यदि पासपोर्ट 10 साल के लिए रिन्यू हो गया तो आवेदक विदेश फरार हो सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले महेश कुमार अग्रवाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए राज्य के विरोध को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 और केंद्र सरकार की 1993 की अधिसूचना के तहत आपराधिक मामला लंबित होने पर भी कोर्ट की अनुमति से पासपोर्ट जारी या रिन्यू किया जा सकता है। आवेदक को हर बार विदेश यात्रा पर जाने से पहले कोर्ट में अलग से आवेदन करना होगा, जिसमें यात्रा का कारण, अवधि और गंतव्य बताना होगा। बिना अदालत की पूर्व अनुमति के वह देश से बाहर नहीं जा सकेगा। संवाद
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न्यायिक मजिस्ट्रेट सिमरन की अदालत ने याची यतिश चंद्र सूद की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है। याची यतिश चंद्र सूद ने अपने पासपोर्ट जो मार्च 2027 तक वैध है को अगले 10 साल के लिए रिन्यू करवाने की अनुमति मांगी थी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने लंबित आपराधिक मामले के चलते कोर्ट से एनओसी (अनुमति) लाने को कहा था। राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि यदि पासपोर्ट 10 साल के लिए रिन्यू हो गया तो आवेदक विदेश फरार हो सकता है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले महेश कुमार अग्रवाल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया का हवाला देते हुए राज्य के विरोध को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 और केंद्र सरकार की 1993 की अधिसूचना के तहत आपराधिक मामला लंबित होने पर भी कोर्ट की अनुमति से पासपोर्ट जारी या रिन्यू किया जा सकता है। आवेदक को हर बार विदेश यात्रा पर जाने से पहले कोर्ट में अलग से आवेदन करना होगा, जिसमें यात्रा का कारण, अवधि और गंतव्य बताना होगा। बिना अदालत की पूर्व अनुमति के वह देश से बाहर नहीं जा सकेगा। संवाद
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