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येलो लाइन से सटे भवनों के लोगों को मिलेगी पार्किंग में प्राथमिकता
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शहर के कई वार्डों में एक ही जगह गाड़ियां पार्क करने पर अड़े हैं लोग, बढ़ रहा विवाद
पार्किंग के लिए 31 अगस्त तक करने होंगे आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम की सड़कों पर लगाई गई येलो लाइन में गाड़ियां पार्क करने को लेकर शहरवासियों में घमासान मचा हुआ है। एक ही जगह पर कई लोग अपनी गाड़ी पार्क करने पर अड़ गए हैं। कंगनाधार, विकासनगर समेत कई वार्डों में पार्किंग के आवंटन पर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जिस भवन के बाहर येलो लाइन लगी होगी, उस भवन मालिक को पार्किंग में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद भी यदि विवाद बढ़ता है तो निगम लॉटरी सिस्टम से पार्किंग आवंटित कर सकता है।
निगम प्रशासन का कहना है कि सभी लोगों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। अभी लोगों को अपने स्थानीय पार्षदों के पास आवेदन करने के लिए कहा है। नगर निगम दफ्तर आकर भी कई लोग आवेदन जमा करवा रहे हैं। अब तक पांच सौ से अधिक लोगों ने पार्किंग के लिए आवेदन कर दिए हैं। 31 अगस्त आवेदन की अंतिम तारीख है। इसके बाद पार्किंग आवंटित की जाएगी।
सड़क के दोनों ओर भवन, किसे देंगे पार्किंग
कंगनाधार समेत कई उपनगरों में सड़क के दोनों ओर लोगों के भवन हैं जबकि पार्किंग सड़क के सिर्फ एक किनारे पर ही लगी है। ऐसे में किसे इस पार्किंग में प्राथमिकता देनी है, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि निगम येलो लाइन की साइड वाले भवनों को पार्किंग सुविधा देता है तो सामने वाले भवनों में रहने वाले लोगों का क्या होगा? इन लोगों का भी पार्किंग पर बराबर का हक है। इस पर अभी से सवाल उठने लगे हैं।
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पार्किंग कम, गाड़ियां तीन गुना ज्यादा
शहर में नगर निगम की सड़क पर लगाई गई येलो लाइन में करीब चार हजार वाहनों को पार्क करने की क्षमता है। लेकिन गाड़ियां इससे करीब तीन गुना ज्यादा है। लोग सालाना शुल्क देकर भी नगर निगम की पार्किंग में अपनी गाड़ी के लिए जगह बुक करने को तैयार है, लेकिन एक ही जगह को लेकर लोग आपस में लड़ने लगे हैं। आने वाले दिनों में निगम की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
साथ लगते घरों को पहले जगह : भारद्वाज
संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने कहा कि येलो लाइन के साथ लगते घरों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। निगम का प्रयास है कि बिना विवाद के आवंटन हो जाए। सभी को पार्किंग का विकल्प दिया जाएगा।
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पार्किंग के लिए 31 अगस्त तक करने होंगे आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में नगर निगम की सड़कों पर लगाई गई येलो लाइन में गाड़ियां पार्क करने को लेकर शहरवासियों में घमासान मचा हुआ है। एक ही जगह पर कई लोग अपनी गाड़ी पार्क करने पर अड़ गए हैं। कंगनाधार, विकासनगर समेत कई वार्डों में पार्किंग के आवंटन पर विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम प्रशासन का कहना है कि जिस भवन के बाहर येलो लाइन लगी होगी, उस भवन मालिक को पार्किंग में प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद भी यदि विवाद बढ़ता है तो निगम लॉटरी सिस्टम से पार्किंग आवंटित कर सकता है।
निगम प्रशासन का कहना है कि सभी लोगों के लिए पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी। अभी लोगों को अपने स्थानीय पार्षदों के पास आवेदन करने के लिए कहा है। नगर निगम दफ्तर आकर भी कई लोग आवेदन जमा करवा रहे हैं। अब तक पांच सौ से अधिक लोगों ने पार्किंग के लिए आवेदन कर दिए हैं। 31 अगस्त आवेदन की अंतिम तारीख है। इसके बाद पार्किंग आवंटित की जाएगी।
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सड़क के दोनों ओर भवन, किसे देंगे पार्किंग
कंगनाधार समेत कई उपनगरों में सड़क के दोनों ओर लोगों के भवन हैं जबकि पार्किंग सड़क के सिर्फ एक किनारे पर ही लगी है। ऐसे में किसे इस पार्किंग में प्राथमिकता देनी है, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि निगम येलो लाइन की साइड वाले भवनों को पार्किंग सुविधा देता है तो सामने वाले भवनों में रहने वाले लोगों का क्या होगा? इन लोगों का भी पार्किंग पर बराबर का हक है। इस पर अभी से सवाल उठने लगे हैं।
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पार्किंग कम, गाड़ियां तीन गुना ज्यादा
शहर में नगर निगम की सड़क पर लगाई गई येलो लाइन में करीब चार हजार वाहनों को पार्क करने की क्षमता है। लेकिन गाड़ियां इससे करीब तीन गुना ज्यादा है। लोग सालाना शुल्क देकर भी नगर निगम की पार्किंग में अपनी गाड़ी के लिए जगह बुक करने को तैयार है, लेकिन एक ही जगह को लेकर लोग आपस में लड़ने लगे हैं। आने वाले दिनों में निगम की भी मुश्किलें बढ़ने वाली हैं।
साथ लगते घरों को पहले जगह : भारद्वाज
संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने कहा कि येलो लाइन के साथ लगते घरों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी। निगम का प्रयास है कि बिना विवाद के आवंटन हो जाए। सभी को पार्किंग का विकल्प दिया जाएगा।