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Pallas's cat: किन्नौर जिले की हंगरंग घाटी में पल्लास बिल्ली कैमरे में कैद, स्वभाव से होती है शर्मीली
Sun, 16 Jun 2024 02:15 PM IST
अंकेश डोगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Sun, 16 Jun 2024 02:15 PM IST
सार
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की हंगरंग घाटी में पहली बार पल्लास बिल्ली (ओटोकोलोबस मैनुल) की फोटो कैमरे में कैद हुई है। पल्लास बिल्ली अपने लंबे, घने फर और विशिष्ट चेहरे की विशेषताओं से पहचानी जाती है।
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पल्लास बिल्ली
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
किन्नौर जिले की हंगरंग घाटी में पहली बार पल्लास बिल्ली (ओटोकोलोबस मैनुल) की फोटो कैमरे में कैद हुई है। बिल्ली की यह प्रजाति किन्नौर जिले में तीन स्थानों पर पाई गई है। गत मार्च से मई माह तक प्रकृति संरक्षण फाउंडेशन (एनसीएफ) के सहयोग से हिमाचल प्रदेश वन्यजीव विंग ने संयुक्त कैमरा ट्रैपिंग सर्वेक्षण किया है, जिसे में नतीजा सामने आया।
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कैमरा ट्रैप में खींचे गए फोटो और वीडियो बिल्ली की प्रजाति के व्यवहार के बारे में जानकारी प्रदान करता है। अनुसंधान के माध्यम से पहचाने गए प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक रूप से लगाए गए कैमरा ट्रैप ने न केवल पल्लास बिल्ली को कैद किया है, बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले हिम तेंदुए, सामान्य तेंदुए, स्टोन मार्टन जैसी अन्य दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के बारे में भी भरपूर डेटा प्रदान किया है।
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पल्लास बिल्ली अपने लंबे, घने फर और विशिष्ट चेहरे की विशेषताओं से पहचानी जाती है। यह मध्य एशिया के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों और हिमालय के कुछ हिस्सों में निवास करती है। यह शर्मीले स्वभाव की होती है।
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''हंगरंग घाटी में पल्लास बिल्ली की उपस्थिति इस प्रजाति के लिए ज्ञात आवासों के महत्वपूर्ण विस्तार का प्रतीक है। नई प्रजाति का मिलना खुशी की बात है। यह खोज हमारे क्षेत्र की जैव विविधता को समझने, संरक्षित करने और सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है''- अमिताभ गौतम, पीसीसीएफ (वन्यजीव)-सह-मुख्य वन्यजीव