फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Organic fertilizer will be prepared from mushroom waste in thirty days

Mushroom Waste: 30 दिन में तैयार की जा सकेगी मशरूम वेस्ट से ऑर्गेनिक खाद, सफल रहा शोध

Tue, 07 Nov 2023 11:56 AM IST
अरविन्द ठाकुर ललित कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
ललित कश्यप, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Tue, 07 Nov 2023 11:56 AM IST
सार

भारत में प्रतिवर्ष करीब पांच लाख मीट्रिक टन मशरूम वेस्ट निकलता है। इसमें 1.9 फीसदी नाइट्रोजन, 0.4 फाॅसफोरस और 2.4 फीसदी पोटैशियम होता है, जो भूमि में पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उसकी उपजाऊ क्षमता को कई गुणा बढ़ाता है।

विज्ञापन
Organic fertilizer will be prepared from mushroom waste in thirty days
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मशरूम अपशिष्ट (वेस्ट) से अब नुकसान नहीं, बल्कि कृषि और बागवानी कार्य में लाभ मिलेगा। मशरूम फसल पूरी होने के बाद खुले में फेंके जाने वाले वेस्ट से अब किसान-बागवान ऑर्गेनिक खाद तैयार कर सकते हैं। इसमें खुंब अनुसंधान निदेशालय (डीएमआर) की ओर से किए जा रहा शोध भी सफल रहा है। इसमें 30 दिन में वेस्ट से ऑर्गेनिक खाद तैयार होगी। डीएमआर के विशेषज्ञों की मानें तो मशरूम के वेस्ट में नाइट्रोजन, फासफोरस व पोटाशियम की प्रचुर मात्रा होती है।

विज्ञापन


ये मिट्टी को उपजाऊ बनाती है। इसका प्रयोग किसान व बागवान मशरूम अवशिष्टों को री-साइकिल करने के बाद कर सकते हैं। इसके अलावा केंचुआ खाद बनाने में भी इसका प्रयोग किया जा सकता है। इसके लिए मशरूम के वेस्ट को साफ-सुथरी जगह पर गड्ढा खोदकर उसमें 8 से 16 माह तक अच्छी तरह सड़ने के बाद तैयार खाद का ही प्रयोग किया जा सकता है। जबकि खुंब निदेशालय ने अपने प्रारंभिक शोध में तीस दिन में ऑर्गेनिक खाद तैयार कर ने का दावा किया है।
विज्ञापन


कच्चे अपशिष्ट से भूमि को नुकसान
जागरूकता के अभाव में कई बार किसान व बागवान मशरूम के कच्चे अपशिष्ट ही खेतों में डाल देते हैैं। इससे जमीन को नुकसान भी होता है। मशरूम वेस्ट को खुले में छोड़ने से जहां कई प्रकार की पर्यावरण समस्याएं पैदा होती हैं, वहीं इससे भूजल भी दूषित होता है। इससे कई हानिकारक साल्ट भूमि के नीचे पानी में मिल जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रतिवर्ष निकलता है पांच लाख मीट्रिक टन वेस्ट
भारत में प्रतिवर्ष करीब पांच लाख मीट्रिक टन मशरूम वेस्ट निकलता है। इसमें 1.9 फीसदी नाइट्रोजन, 0.4 फाॅसफोरस और 2.4 फीसदी पोटैशियम होता है, जो भूमि में पोषक तत्वों की कमी को दूर करके उसकी उपजाऊ क्षमता को कई गुणा बढ़ाता है। इसमें मशरूम वेस्ट को पांच फीसदी के हिसाब से खेतों में डालने से भूमि की पोटाशियम व फाॅसफोरस की कमी दूर होगी। इसके अलावा यदि इसे 25 फीसदी के हिसाब से खेतों में मिलाया जाए तो यह नाइट्रोजन की कमी को भी दूर करेगा।


प्रथम चरण का सफल रहा शोध
खुंब निदेशालय सोलन के निदेशक डॉ. वीपी शर्मा ने बताया कि मशरूम वेस्ट का उपयोग, कृषि, बागबानी व भूमि सुधार के लिए किया जा सकता है। निदेशालय ने वेस्ट से तीस दिन में खाद तैयार करने का प्रारंभिक शोध सफल रहा है। इस पर अभी और कार्य किया जा रहा है। इसे और बेहतरीन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसमें पानी सोखने की अधिक क्षमता होती है, जिससे खेतों में लंबे समय तक नमी रहती है। इससे किसानों को लाभ मिलेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed