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Shimla News: आदेश बेअसर, ओल्ड बैरियर से खलीनी तक सड़क किनारे वोल्वो बसों का कब्जा
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जाम से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने नई पार्किंग व्यवस्था लागू की थी। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि आदेश लागू होने के बाद भी ओल्ड बैरियर से खलीनी तक बाहरी राज्यों से आई वॉल्वो बसों की कतारें लगी हुई हैं। वीरवार को संवाददाता हर्षित शर्मा ने मौके का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट :-
शोघी में बसों को पार्किंग करने के दिए थे आदेश
16 से ज्यादा बाहरी राज्यों की बसें मिलीं पार्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में ओल्ड बैरियर से खलीनी तक यातायात जाम कम करने के लिए जिला प्रशासन ने हाल ही में नई पार्किंग व्यवस्था लागू की है। इसमें बाहरी राज्यों की निजी वोल्वो बसों को शोघी में पार्क करने और आईएसबीटी क्रॉसिंग पर केवल सवारियां उतारने तथा बैठाने की अनुमति दी है। लेकिन नई व्यवस्था का पालन अब धरातल पर नहीं दिख रहा।
ओल्ड बैरियर से खलीनी तक 16 से अधिक बाहरी राज्यों की निजी वोल्वो बसें सड़क किनारे पार्क मिलीं। कई बसें लंबे समय तक यहीं खड़ी रहीं। जिला प्रशासन के निर्देश हैं कि यात्रियों को उतारने और बैठाने के बाद बसों को सीधे शोघी स्थित पार्किंग स्थल पर ले जाया जाए। सड़क किनारे खड़ी बड़ी बसों के कारण इस मार्ग पर वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम है। कई स्थानों पर बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान दूसरे वाहनों को धीमी गति से निकलना पड़ता है। सड़क तंग होने से लगातार हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों अनीश, अमन और रिया ने कहा कि सड़क के एक हिस्से पर लगातार बड़ी बसें खड़ी रहने से ओल्ड बैरियर से आईएसबीटी तक यातायात का दबाव बना रहता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद थी लेकिन सड़क पर हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं।
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मौके पर दिख रही स्थिति से साफ है कि आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा। सड़क किनारे पहले की तरह निजी वोल्वो बसों की पार्किंग जारी रहने से नई व्यवस्था का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इन आदेशों को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी और कार्रवाई कब शुरू करते हैं।
ट्रक और निजी बसें भी बढ़ा रहे दबाव
ओल्ड बैरियर से खलीनी तक सड़क किनारे केवल निजी वोल्वो बसें ही नहीं बल्कि ट्रक, निजी बसें और अन्य भारी वाहन भी लंबे समय तक खड़े रहते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई और कम हो जाती है। बड़े वाहनों के कारण कई जगह आवाजाही प्रभावित होती है और यातायात का दबाव बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क किनारे खड़े सभी भारी वाहनों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई नहीं हुई तो केवल वोल्वो बसों की पार्किंग बदलने से जाम की समस्या का समाधान नहीं होगा।
एचआरटीसी ने भी उठाया था मुद्दा
हिमाचल पथ परिवहन निगम लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। सरकार के अनुसार निगम को हर महीने 70 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा उठाना पड़ रहा है। संचयी घाटा 2200 करोड़ रुपये से अधिक है। दूसरी ओर वोल्वो सेवाएं निगम की सबसे अधिक राजस्व देने वाली सेवाओं में शामिल हैं। निगम का कहना था कि ओल्ड बैरियर से आईएसबीटी तक निजी वोल्वो बसों की सड़क किनारे पार्किंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और उसका बसों के संचालन पर भी असर पड़ता है। इस मामले को प्रशासन के समक्ष रखा है।
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जाम से राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने नई पार्किंग व्यवस्था लागू की थी। जमीनी पड़ताल में सामने आया कि आदेश लागू होने के बाद भी ओल्ड बैरियर से खलीनी तक बाहरी राज्यों से आई वॉल्वो बसों की कतारें लगी हुई हैं। वीरवार को संवाददाता हर्षित शर्मा ने मौके का जायजा लिया। पेश है ग्राउंड रिपोर्ट :-
शोघी में बसों को पार्किंग करने के दिए थे आदेश
16 से ज्यादा बाहरी राज्यों की बसें मिलीं पार्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में ओल्ड बैरियर से खलीनी तक यातायात जाम कम करने के लिए जिला प्रशासन ने हाल ही में नई पार्किंग व्यवस्था लागू की है। इसमें बाहरी राज्यों की निजी वोल्वो बसों को शोघी में पार्क करने और आईएसबीटी क्रॉसिंग पर केवल सवारियां उतारने तथा बैठाने की अनुमति दी है। लेकिन नई व्यवस्था का पालन अब धरातल पर नहीं दिख रहा।
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ओल्ड बैरियर से खलीनी तक 16 से अधिक बाहरी राज्यों की निजी वोल्वो बसें सड़क किनारे पार्क मिलीं। कई बसें लंबे समय तक यहीं खड़ी रहीं। जिला प्रशासन के निर्देश हैं कि यात्रियों को उतारने और बैठाने के बाद बसों को सीधे शोघी स्थित पार्किंग स्थल पर ले जाया जाए। सड़क किनारे खड़ी बड़ी बसों के कारण इस मार्ग पर वाहनों के लिए उपलब्ध जगह कम है। कई स्थानों पर बड़े वाहनों के गुजरने के दौरान दूसरे वाहनों को धीमी गति से निकलना पड़ता है। सड़क तंग होने से लगातार हादसे का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों अनीश, अमन और रिया ने कहा कि सड़क के एक हिस्से पर लगातार बड़ी बसें खड़ी रहने से ओल्ड बैरियर से आईएसबीटी तक यातायात का दबाव बना रहता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इस स्थिति में बदलाव की उम्मीद थी लेकिन सड़क पर हालात पहले जैसे ही दिखाई दे रहे हैं।
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मौके पर दिख रही स्थिति से साफ है कि आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा। सड़क किनारे पहले की तरह निजी वोल्वो बसों की पार्किंग जारी रहने से नई व्यवस्था का उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आ रहा। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग इन आदेशों को प्रभावी बनाने के लिए निगरानी और कार्रवाई कब शुरू करते हैं।
ट्रक और निजी बसें भी बढ़ा रहे दबाव
ओल्ड बैरियर से खलीनी तक सड़क किनारे केवल निजी वोल्वो बसें ही नहीं बल्कि ट्रक, निजी बसें और अन्य भारी वाहन भी लंबे समय तक खड़े रहते हैं। इससे सड़क की चौड़ाई और कम हो जाती है। बड़े वाहनों के कारण कई जगह आवाजाही प्रभावित होती है और यातायात का दबाव बढ़ जाता है। लोगों का कहना है कि यदि सड़क किनारे खड़े सभी भारी वाहनों के खिलाफ एक साथ कार्रवाई नहीं हुई तो केवल वोल्वो बसों की पार्किंग बदलने से जाम की समस्या का समाधान नहीं होगा।
एचआरटीसी ने भी उठाया था मुद्दा
हिमाचल पथ परिवहन निगम लंबे समय से वित्तीय संकट का सामना कर रहा है। सरकार के अनुसार निगम को हर महीने 70 करोड़ रुपये का परिचालन घाटा उठाना पड़ रहा है। संचयी घाटा 2200 करोड़ रुपये से अधिक है। दूसरी ओर वोल्वो सेवाएं निगम की सबसे अधिक राजस्व देने वाली सेवाओं में शामिल हैं। निगम का कहना था कि ओल्ड बैरियर से आईएसबीटी तक निजी वोल्वो बसों की सड़क किनारे पार्किंग से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और उसका बसों के संचालन पर भी असर पड़ता है। इस मामले को प्रशासन के समक्ष रखा है।