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Shimla News: फ्लैट न देने पर 50.49 लाख रुपये लौटाने के दिए आदेश

Tue, 02 Sep 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Sep 2025 11:59 PM IST
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Order given to return Rs 50.49 lakh for not giving flat
हरियाणा. और चंडीगढ़ के लिए जरूरी
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हरियाणा के रियल एस्टेट कारोबारियों पर शिकंजा
उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह की पीठ ने सुनाया फैसला, चंडीगढ़ के सुदर्शन ने सोलन में खरीदे थे दो फ्लैट

मुकदमे की लागत व अन्य खर्च के 2 लाख देने होंगे
दीपक मेहता
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रियल एस्टेट कारोबारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने हरियाणा के पंचकूला निवासी रीना गनेरीवाला और महेश गनेरीवाला (प्रतिवादी) को शिकायतकर्ता सुदर्शन लाल कौरा को फ्लैट की कीमत 50.49 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। साथ ही प्रतिवादियों को शिकायतकर्ता को 1.50 लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न और 50 हजार रुपये मुकदमा खर्च देना होगा।
आयोग ने प्रतिवादियों को निर्देश दिए हैं कि वह शिकायतकर्ता को 50,49,000 रुपये और 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 19 जून 2015 से अदायगी करें। साल 2014 में चंडीगढ़ (यूटी) के सेक्टर 44-डी निवासी शिकायतकर्ता सुदर्शन लाल कौरा और उनकी पत्नी ने प्रतिवादियों से सोलन में दो फ्लैट खरीदे थे। इसमें से एक फ्लैट का कब्जा दे दिया था जबकि दूसरे का नहीं दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आयोग से गुहार लगाई थी। राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर ने माना कि न तो कब्जा दिया और न ही फ्लैट में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध थीं। यह सेवा में कमी और अनुचित व्यापार आचरण का स्पष्ट मामला है। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। संवाद
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यह है पूरा मामला
शिकायतकर्ता और उनकी पत्नी प्रतिवादियों के प्रलोभन में आकर दो अलग-अलग समझौते कर दो 3 बीएचके फ्लैट (बेसमेंट-1 का फ्लैट नंबर 1 और बेसमेंट-2 का फ्लैट नंबर 1) खरीदने पर सहमत हुए। मई 2014 में दोनों फ्लैटों के लिए 1,02,00,000 रुपये (प्रति फ्लैट 51 लाख) का भुगतान किया। इनमें से 51 हजार रुपये नकद दिए गए। भवन के बेसमेंट-2 में फ्लैट नंबर एक का बिक्री विलेख 12 मई 2016 को शिकायतकर्ता के नाम पंजीकृत हुआ। वहीं दूसरे फ्लैट के लिए शिकायतकर्ता लगातार प्रतिवादियों से धारा 118, हिमाचल प्रदेश भू-स्वामित्व एवं भूमि सुधार अधिनियम 1972 के तहत अनुमति के लिए आवश्यक दस्तावेज मांगते रहे ताकि बिक्री विलेख पंजीकृत हो सके लेकिन प्रतिवादियों ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए। 11 जनवरी 2019 को शिकायतकर्ता की पत्नी का देहांत हो गया। इसके बाद भी शिकायतकर्ता ने कई बार प्रतिवादियों से आग्रह किया, कानूनी नोटिस भी दिया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने राज्य उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की थी।
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