पंचायतों में अब ई-टेंडर से होंगे काम, डेढ़ लाख से ज्यादा के कार्यों के ऑनलाइन होंगे टेंडर
प्रदेश की पंचायतों में सभी निर्माण संबंधी बड़े विकास कार्य ई-टेंडर से होंगे। पहले ऑनलाइन टेंडर नहीं होते थे, जिससे निर्माण कार्य लंबे समय तक लटके रहते थे। इससे पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित होते थे। कई पंचायतों के प्रतिनिधि इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ई-टेंडर प्रक्रिया सख्ती से लागू करने जा रही है।
सरकार ने इस बात पर कड़ा नोटिस लिया है कि प्रदेश की कई पंचायतों में निर्माण कार्यों के बार-बार टेंडर लगने के बाद भी काम शुरू नहीं हो रहे। इससे पंचायतों में केंद्रीय योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। यही नहीं, विकास कार्यों के समय पर शुरू न हो पाने से केंद्रीय योजनाओं के लिए आ रहा फंड भी लैप्स हो रहा है।
केंद्र ने ग्रामीण इलाकों के विकास और लोगों के उत्थान के लिए कई योजनाएं आरंभ की हैं। सरकार का मानना है कि अगर इन योजनाओं को कारगर तरीके से लागू करना है तो इसके लिए ई-टेंडर करवाने अनिवार्य हैं। इससे निर्माण कार्यों के लिए कंपनियां और ठेकेदार उपयुक्त संख्या में आगे आ सकेंगे।
पुरानी टेंडर प्रक्रिया में यह थी समस्या
पुरानी टेंडर प्रक्रिया में बड़ी समस्या यही थी कि डेढ़ लाख रुपये से अधिक के बड़े कामों के लिए ठेकेदार आगे नहीं आते थे। इस कारण से पंचायतों के डेढ़ लाख से अधिक के काम के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य की है।
पंचायतों में केंद्रीय योजनाओं के काम समय पर शुरू नहीं हो रहे और न ही टेंडर के लिए ठेकेदार आगे आ रहे हैं। इस कारण से निर्माण कार्य बाधित हो रहे हैं। अब सरकार पंचायतों के कामों को लेकर ई- टेंडर अनिवार्य कर रही है। - वीरेंद्र कंवर, पंचायती राज मंत्री