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रियासत काल में यहां लोहड़ी की रात माफ था एक खून, जानिए पूरा मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंबा Updated Mon, 14 Jan 2019 10:55 AM IST
one murder was allowed on Lohadi's night in the princely state chamba
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उत्तर भारत के लोकप्रिय त्योहार लोहड़ी के साथ चंबा की हिंसक लोहड़ी का इतिहास आज भी हैरत में डाल देता है। देश की आजादी से पहले लोहड़ी पर्व खूनी संघर्ष की तर्ज पर मनाया जाता था। इस दौरान अगर किसी की जान चले जाती थी तो एक खून माफ था।
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वर्तमान में इसे प्रशासन की देखरेख में छीनाझपटी के संघर्ष तक सीमित कर दिया गया है। इसके बावजूद हर साल पर्व मनाते समय कई लोग घायल हो जाते हैं। लोहड़ी की रात को सदियों से चले आ रहे मढि़यों के संघर्ष को बुरी शक्तियों को भगाने की मान्यता है।

स्थानीय लोग हर साल इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं। सैकड़ों लोग दिन का कामकाज निपटाकर मढि़याें के संघर्ष की परंपरा का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।दरअसल, सदियों से सुराड़ा क्षेत्र को राज मढ़ी (पुरुष) का दर्जा दिया गया है।

 
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टोलियों को 13 मढि़यों में जाकर स्थापित करनी होती है पालकी

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