कांगड़ा में ब्लैक फंगस का एक और मामला
हिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस का छठा मामला सामने आया है। मरीज कांगड़ा के टांडा मेडिकल कालेज के कोविड वार्ड में उपचाराधीन हैं।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में ब्लैक फंगस का छठा मामला सामने आया है। मरीज कांगड़ा के टांडा मेडिकल कालेज के कोविड वार्ड में उपचाराधीन हैं। जिले में यह तीसरा मामला है। तीनों टांडा में ही उपचाराधीन है। तीन मरीज आईजीएमसी शिमला में भर्ती हैं।
सोमवार को ब्लैक फंगस का तीसरा मामला आने के बाद टांडा में उसकी भी सर्जरी कर के इन्फेक्शन वाले हिस्से को निकाल दिया गया है। सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है और उनका उपचार किया जा रहा है। सीएमओ कांगड़ा डॉ. गुरदर्शन गुप्ता ने मामले की पुष्टि की है। जिला कांगड़ा में ब्लैक फंगस से निपटने के लिए विभाग के पास पर्याप्त दवाइयां हैं।
राज्य सरकार ने ब्लैक फंगस के उपचार का जारी किया प्रोटोकॉल
राज्य कोविड क्लीनिकल कमेटी ने ब्लैक फंगस के उपचार के लिए विस्तृत उपचार प्रोटोकॉल तैयार किया है। ब्लैक फंगस मानव शरीर के नाक, आंख और मस्तिष्क क्षेत्र को प्रभावित करता है। महामारी के दौरान ब्लैक फंगस बढ़ने का कारण कोविड-19 संक्रमण से मधुमेह बिगड़ने की प्रवृत्ति होती है। रोगियों में नए मधुमेह का विकास होता है और कभी-कभी श्वेत रक्त कोशिकाओं की कमी हो जाती है। इसके अलावा, कोविड-19 मरीजों के उपचार में उपयोग किए जा रहे स्टेरॉयड जैसे इम्यूनोसप्रेसिव उपचार से भी इम्यूनिटी में कमी आती है।
स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी ने बताया कि इस संक्रमण के लिए व्यक्ति को मुख्य तौर पर जिन लक्षणों के बारे में सतर्क रहने की आवश्यकता है, उनमें सिरदर्द, नाक में लगातार रुकावट बनी रहना, दवाओं का कोई असर नहीं होना, नाक का बहना, दर्द या चेहरे पर सनसनी, त्वचा का मलिनीकरण, दांतों का ढीला होना, तालू का अल्सर, नाक गुहा और साइनोसाइटिस में ब्लैक नेक्रोटिक एस्चर आदि शामिल हैं।
ब्लैक फंगस रोग आंखों को भी प्रभावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप आंखों में सूजन और लाली, दोहरा दिखाई देना, नजर कमजोर होना, आंखों में दर्द आदि हो सकता हैं। कुछ प्रयोगशालाओं की जांच में पाया गया हैं कि रक्त जांच, नाक की एंडोस्कोपिक जांच, एक्स-रे, सीटी स्कैन, बायोप्सी, नाक क्रस्ट सैंपलिंग, ब्रोन्को एल्वोलर लैवेज आदि से भी यह बीमारी हो सकती है। म्यूकॉरमायकोसिस चिकित्सा प्रबंधन का मानना है कि इस बीमारी का समय पर पता चल जाने से मरीज इससे पूरी तरह से ठीक हो जाता है।