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Shimla News: डेबिट कार्डधारक की मौत पर परिजनों को मिलेंगे 6.5 लाख

Sat, 06 Sep 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sat, 06 Sep 2025 11:59 PM IST
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On death of the debit card holder, the family will get Rs 6.5 lakh
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष ने सुनाया फैसला
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बिलासपुर उपभोक्ता आयोग के फैसले को पलटा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता ने एक्सिस बैंक और न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी को संयुक्त रूप से उपभोक्ता को 6.5 लाख रुपये अदा करने का आदेश दिया।

आयोग ने माना कि मृतक खाता धारक के डेबिट कार्ड पर बीमा कवर सक्रिय था और दोनों संस्थाएं भुगतान से बच नहीं सकतीं। आयोग ने आदेश दिए हैं कि बीमा कंपनी को 5 लाख रुपये बीमा राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित (27 सितंबर 2018 से भुगतान तक) अदा करनी होंगी। बैंक और बीमा कंपनी दोनों को संयुक्त रूप से एक लाख रुपये मानसिक उत्पीड़न तथा 50 हजार रुपये वाद व्यय के रूप में देने होंगे। आदेश का पालन 45 दिन में करना होगा।जिला बिलासपुर के तहसील घुमारवीं निवासी अपीलकर्ता बालदेव भाटिया के पुत्र जगत प्रकाश की 18 सितंबर 2017 को सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। जगत प्रकाश का एक्सिस बैंक की बद्दी शाखा में खाता धारक था और उसे बैंक ने डेबिट कार्ड जारी किया था। इस कार्ड पर पांच लाख रुपये का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध था। मृत्यु के बाद परिजनों ने दावा प्रस्तुत किया लेकिन बैंक और बीमा कंपनी ने भुगतान करने से मना कर दिया। इसके बाद न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग बिलासपुर में गुहार लगाई गई। लेकिन आयोग ने 27 मार्च 2024 को शिकायत खारिज कर दी। इसके बाद मृतक के आश्रितों ने न्याय के लिए राज्य उपभोक्ता में अपील दायर की।
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आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की है कि मृतक ने दुर्घटना से कुछ दिन पहले तक कार्ड का उपयोग किया था इसलिए बीमा कवर सक्रिय था। बैंक ने भी स्वीकार किया कि उसके डेबिट कार्ड धारकों को न्यू इंडिया एश्योरेंस के माध्यम से बीमा सुविधा दी जाती है। 90 दिन की देरी का तर्क महत्वहीन है, क्योंकि एफआईआर और मृत्यु प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं। बीमा कवर समाप्त होने का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।
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बैंक और बीमा कंपनी का पक्ष
एक्सिस बैंक का कहना था कि बीमा राशि सीधे बीमा कंपनी को देनी थी, बैंक केवल सुविधा प्रदाता है और परिजनों ने 90 दिन में सूचना नहीं दी, इसलिए दावा अमान्य है। इसके अलावा बीमा कंपनी ने दावा किया था कि उसके पास कोई दावा प्राप्त नहीं हुआ और यह भी सिद्ध नहीं हुआ कि मृतक उसके पास बीमित था। देनदारी नहीं बनती है।
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