अब हिमाचल में होगा आवाज और वीडियो का विश्लेषण
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हिमाचल में होने वाले अपराध में शामिल लोगों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाने में अब फोरेंसिक प्रयोगशाला और बेहतर काम कर सकेगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला जुन्गा में आवाज और वीडियो विश्लेषण मशीन का उद्घाटन और चतुर्थ श्रेणी के टाइप-1 के आवासीय परिसर का शिलान्यास किया। अब पुलिस को मोबाइल और डिजिटल डिवाइस में दर्ज होने वाली वॉयस और वीडियो रिकॉर्डिंग की विशेषज्ञ जांच के लिए चंडीगढ़, अहमदाबाद या हैदराबाद का रुख नहीं करना पड़ा करेगा। जुन्गा स्थित लैब में ही इन सैंपलों की जल्द रिपोर्ट मिल जाएगी। फिरौती, लेनदेन, भ्रष्टाचार, धमकी, लड़ाई झगड़े, अश्लील बातों के मामलों की जांच के दौरान डिजिटल डिवाइस अहम भूमिका निभाते हैं।
इन उपकरणों में इस्तेमाल करने वाले के वह राज छिपे होते हैं, जो वह किसी करीबी को भी नहीं बताता। ऐसे में इन डिवाइसों की फोरेंसिक जांच से अपराध की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलती है। अभी तक आवाज और वीडियो विश्लेषण संबंधित आपराधिक मामले जांच के लिए सैंपल सीएसएफएल चंडीगढ़, अहमदाबाद और हैदराबाद भेजे जाते थे, साथ ही संदिग्ध व्यक्ति को साथ लाने ले जाने में असुविधा तथा खर्चा भी होता था। इस अवसर पर फोरेंसिक निदेशक डॉ. अरुण शर्मा मौजूद रहे।