फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Now the crop of tomato, peas and mango is in crisis due to dry weather

मौसम की बेरुखी: हिमाचल में अब टमाटर, शिमला मिर्च और मटर पर मार

Sun, 03 Apr 2022 12:23 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला ब्यूरो, सोलन/शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी/अमर उजाला ब्यूरो, सोलन/शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 03 Apr 2022 12:23 PM IST
सार

देश-दुनिया में टमाटर के लिए मशहूर सोलन जिले में अभी तक मात्र 10 फीसदी फसल की ही रोपाई हो पाई है, जबकि बीते साल इन दिनों किसान टमाटर की आधी फसल रोप चुके थे। शिमला मिर्च का भी यही हाल है।

विज्ञापन
Now the crop of tomato, peas and mango is in crisis due to dry weather
नकदी फसलों पर मौसम की मार। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल में मौसम की बेरुखी की मार अब खेती और बागवानी पर भी पड़ने लगी है। गेहूं तो पहले ही समय पूर्व पकने लगी है, अब टमाटर, मटर और आम की फसल पर संकट मंडरा गया है। देश-दुनिया में टमाटर के लिए मशहूर सोलन जिले में अभी तक मात्र 10 फीसदी फसल की ही रोपाई हो पाई है, जबकि बीते साल इन दिनों किसान टमाटर की आधी फसल रोप चुके थे। शिमला मिर्च का भी यही हाल है। बिना बारिश और सिंचाई के किसान सूखे खेतों में रोपाई नहीं कर पा रहे हैं।

विज्ञापन


बढ़ता तापमान उन्हें चिंता में डाल रहा है। जिला कृषि अधिकारी सीमा कंसल ने बताया कि सोलन जिले में 8100 हेक्टेयर भूमि पर टमाटर की खेती होती है, लेकिन अभी तक सिर्फ 10 फीसदी क्षेत्र में टमाटर और 20 फीसदी में शिमला मिर्च की रोपाई हो सकी है। 65 फीसदी क्षेत्रों के किसान बारिश के इंतजार में है। लोअर हिमाचल में ज्यादा गर्मी से आम उत्पादक परेशान हैं। आम के बौर पर असर पड़ना शुरू हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी ज्यादा दिन रही तो छोटे फल झड़ सकते हैं।
विज्ञापन


उधर, शिमला समेत अन्य जिलों के हरे मटर की फसल सूखे की चपेट में आने से किसानों को करोड़ों के नुकसान का अंदेशा है। कई किसानों का तो बीज का पैसा भी नहीं निकल पाएगा। शिमला के हरे मटर की महाराष्ट्र और गुजरात में भारी मांग रहती है। शिमला जिले के सब्जी उत्पादक नगदी फसल के रूप में मटर की खेती करते हैं। राजधानी के आसपास कसुम्पटी, ठियोग, कोटखाई, चौपाल, रोहड़ू, चिड़गांव और जुब्बल में बड़े पैमाने पर किसानों ने नवंबर, दिसंबर में मटर लगाया था। 15 मार्च के बाद बारिश न होने से मटर के पौधे सूखने लगे हैं। ठियोग की धमांदरी पंचायत के बड़ोग निवासी राजेश शर्मा ने करीब दस हजार रुपये खर्च कर 15 किलो बीज लगाया था। पूरी फसल सूख गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन



शिमला में संकट मोचन के समीप बढ़ई गांव के किसान जय शिव ठाकुर ने बताया कि अरकल किस्म का 11 किलो बीज लगाया था, बारिश न होने से पत्ते पीले पड़ने लगे हैं। जनेड़घाट के ठूंड गांव निवासी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि 300 रुपये किलो वाला जेके किस्म का 12 किलो बीज लगाया था। 12 से 15 क्विंटल फसल लगने का अनुमान था। बारिश न होने से फलियों का साइज नहीं बढ़ा और सूख कर सफेद हो गईं। 80 हजार से एक लाख का नुकसान हो गया। ढली मंडी की करोल ब्रदर्स फर्म के संचालक अक्षय करोल ने बताया कि इस सीजन में सूखे के कारण मटर की क्वालिटी प्रभावित हुई है। बढ़िया मटर की देश भर में मांग रहती है, लेकिन इस बार सीजन की शुरुआत में क्वालिटी मटर मंडी में नहीं आ रहा है।

शिमला में सालाना 80 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन
सीजन में बढ़िया किस्म के मटर का थोक रेट 80 से 100 रुपये किलो तक रहता है। अकेले शिमला की ढली मंडी से रोजाना 300 से 400 क्विंटल मटर बाहरी राज्यों को भेजा जाता है। शिमला जिले में 7030 हेक्टेयर भूमि पर मटर की खेती होती है। किस्म के हिसाब से 60 से 120 दिन में मटर तैयार होता है। शिमला जिले में सालाना करीब 80 हजार मीट्रिक टन मटर का उत्पादन होता है।


किसानों का बीज का भी पैसा नहीं निकल पाया: तंवर
सूखे की मार पड़ने से मटर की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में किसानों का बीज का पैसा भी नहीं निकल पाया है। सबसे अधिक असर मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पड़ा है। जहां सिंचाई की सुविधा नहीं है वहां किसानों की पूरी फसल ही बरबाद हो गई है।
- डॉ. कुलदीप सिंह तंवर राज्य अध्यक्ष, हिमाचल किसान सभा

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed