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नेताओं की मौज, विधायकी छूटते ही लग जाएगी 78 हजार पेंशन

Thu, 14 Apr 2016 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 14 Apr 2016 09:21 AM IST
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 Now 78 thousand pension for Ex MLA in himachal.
विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं।

सरकारी कर्मचारी 58-60 साल की उम्र तक सेवाएं देने के बाद पेंशन के काबिल बनते हैं लेकिन विधायक साहबान शपथ लेने के तुरंत बाद ही पेंशन लेने के हकदार हो जाते हैं। एक बार शपथ हो गई तो उसके बाद पांच साल तक विधायक रहें या नहीं, ताउम्र पेंशन के लिए पात्र हो जाएंगे।

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मृत्यु भी हो जाए तो भी विधवा या उनके माइनर बच्चे को पेंशन मिलती है। दूसरी बार विधायक बनने पर हर साल 1000 रुपये की दर से पेंशन बढ़ती है। हाल में हुए संशोधन के बाद अब विधायकी जाने के बाद किसी भी एमएलए की करीब 78 हजार रुपये की पेंशन लग जाएगी।
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साल 1971 में बने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए 5000 रुपये की मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया था। बाद में कई संशोधनों के बाद अभी तक ये 22000 रुपये थी। अब इसे बढ़ाकर 36000 रुपये कर दिया गया है।

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डीए के साथ 78 हजार से भी ज्यादा पैंशन

 Now 78 thousand pension for Ex MLA in himachal.
अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है। - फोटो : demo pic

प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में इसे बढ़ाने के लिए इस अधिनियम में संशोधन किया गया है। विधायक सुविधा समिति की संस्तुति के बाद सरकार ने पहले इसे 22 हजार से बढ़ाकर 28 हजार रुपये करने का फैसला किया था। सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों के इस बीच अनुरोध के बाद इसे बढ़ाकर 36 हजार रुपये मासिक कर दिया गया।

अब 36 हजार मासिक पेंशन में 119 प्रतिशत डीए जोड़ा जाए तो ये पेंशन 78,840 रुपये बनती है। यानी, अब पूर्व विधायक इतनी या इससे ज्यादा पेंशन के हकदार हो जाएंगे। जो दो टेन्योर में विधायक रहे हैं, उनके लिए ये पेंशन अब हर साल 1000 रुपये की दर से बढ़ती रहेगी।

यानी, नई बढ़ोतरी के बाद ही कई पूर्व विधायकों की पेंशन 80 हजार से भी पार हो जाएगी। अगर पेंशन ले रहे पूर्व विधायक की मौत हो जाती है तो उसका परिवार भी पेंशन लेने का हकदार हो जाता है। परिवार में विधवा पत्नी या पत्नी के न होने पर कानूनी तौर पर वारिस माइनर बच्चे को आधी पेंशन मिलती है।

लगातार विधायक रहे हों या नहीं, पेंशन मिलेगी ही
हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम 1971 की धारा 6 बी में ये व्यवस्था की गई है कि पेंशन का हकदार हर वह आदमी होगा, जो पांच साल के कार्यकाल तक विधानसभा का सदस्य रहा हो। वह चाहे लगातार पांच साल तक सदस्य रहा हो या नहीं।

यहां पढ़िए जनता क्या कह रही है

 Now 78 thousand pension for Ex MLA in himachal.
व्हाट्सऐप के जरिए जनता ने अमर उजाला को भेजी अपनी राय।

अगर पैसे कमाने का, पेंशन लेने का, जनता को अपना गुलाम समझने का, ऐशो आराम की जिंदगी का मजा लेना हो तो नेता बनो। ये है भारत। -मनीष, मंडी

अपनी पेंशन बढ़ाने की बजाय से इन्हें पब्लिक के लिए सुविधा बढ़ानी चाहिए। पब्लिक इन्हें काम करने के लिए वोट देती है न कि अपनी जेब भरने के लिए। -राकेश पांडेय, खिलनी

जो कर्मचारी 58 या 60 साल तक देश प्रदेश की सेवा करता है उसको कोई पेंशन नहीं, और जो एक दिन के लिए भी विधायक बन जाए उसे पेंशन। खुद के विधायक ध्वनि मत से पारित करते हैं और कर्मचारियों का वेतन बढ़ाना हो तो काम न करने की दलील देकर शोर मचाते हैं। ये बेहद दुखद है और गलत परंपरा है जिसे बदलने की जरूरत है। -महेश शर्मा, बिलासपुर

आज विधायक जितना पैसा अपनी पेंशन के लिए तय कर रहे हैं उस पैसे को अगर बेरोजगार युवाओं को दिया जाता तो उन्हें भी मदद मिलती। विधायकों के वेतन और पेंशन बढ़ाने के लिए अब एक सिस्टम बनाने की जरूरत है। -बलदेव धीमान, हमीरपुर

वैसे तो विपक्ष हमेशा सदन में वाकआउट करता है पर जब बारी अपनी पेंशन और वेतन बढ़ोतरी की आई तो किसी ने शोर नहीं किया। अगर यह पैसा शिक्षा के बजट में जोड़ देते तो उसका स्तर भी सुधरता और लोगों को अपने बच्चों को भी पढ़ाने में रुचि जगेगी। -कुसुम खत्री, शिमला

इन विधायकों को अपनी सैलरी और पेंशन बढ़ाने से पहले एक बार सोचना चाहिए था कि जितना पैसा ये बढ़ा रहे हैं उतना तो इस प्रदेश के बड़ी संख्या में काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन भी नहीं होगा। -इ. मोहन, एचपीयू

प्रदेश के नेताओं ने अपने वेतन और पेंशन के प्रस्ताव को एक ही बार में पास कर लिया लेकिन प्रदेश में अध्यापक रखने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। अगर कर्ज का बोझ है तो सरकार ने इनका वेतन क्यों बढ़ाया। -शकील मोहम्मद, ऊना

मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ सकती है तो विधायकों का वेतन क्यों नहीं: सीएम

 Now 78 thousand pension for Ex MLA in himachal.
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह - फोटो : फाइल फोटो

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह विधायकों के बचाव में आ गए हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन बढ़ता है, मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ाई जाती है तो विधायकों के खर्च बढ़ने पर वेतन बढ़ाना भी जरूरी है।

छोटा शिमला स्कूल भवन के लोकार्पण कार्यक्रम में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पत्रकारों के सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा विधायकों को बढ़ा हुआ वेतन बुरा लग रहा है तो वे इसे न लें, कोई जबरदस्ती थोड़े है।

उन्होंने कहा कि विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाए जाने के मामले में भाजपा विधायक दोहरी राजनीति कर रहे हैं। विधानसभा में वेतन बढ़ाने के बिल को पास करने के लिए इन्होंने भी वोट किया था। अब उन्हें यह बुरा लग रहा है।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा अनुराग ठाकुर के बयान पर उन्होंने कहा कि उनके खेल का मतलब सिर्फ क्रिकेट ही है। मेरे लिए गिल्ली डंडे से शुरू होता है और क्रिकेट पर समाप्त होता है। मेरे लिए सभी खेल एक समान हैं। इन्हें प्रोत्साहन के लिए सरकार कार्य कर रही है।

फीस वृद्धि की हद पार करने वालों पर होगी कार्रवाई-
स्कूलों की फीस बढ़ोतरी के विरोध के सवाल पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि निजी स्कूलों का अपना फीस स्ट्रक्चर होता है, उसमें सरकार हस्तक्षेप नहीं करती। यदि कोई स्कूल हद ही पार कर दे तो शिकायत आने पर सरकार उचित कार्रवाई कर सकती है।

राजधानी में पेयजल संकट पर वीरभद्र सिंह ने शहर की जनता से पानी का उचित प्रयोग करने का आह्वान किया। कहा कि जल संकट दूर करने के लिए अश्वनी खड्ड में व्यवस्थाओं में जल्द सुधार किया जाएगा और शहर को पेयजल आपूर्ति शुरू करने के प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कैग की रिपोर्ट में जरूरत से अधिक स्कूल और हेल्थ सेंटर खोले जाने पर उठाए सवाल के जवाब में कहा कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और मुश्किलों भरे जीवन को देखते हुए ही लोगों की सुविधा के लिए स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। एयरपोर्ट के मामले पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नए एयरपोर्ट बनाने के लिए स्थानों का निरीक्षण किया जा रहा है।

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