बाल दिवस पर भी शर्मिंदगी झेलते रहे मासूम
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देशभर के स्कूलों में भारत सरकार के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन (बाल दिवस) को भले ही स्वच्छता दिवस से जोड़कर मनाया जा रहा है, लेकिन ज्वालामुखी के आधा दर्जन आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे शर्मिंदगी झेल रहे हैं।
इन केंद्रों में शौचालय ही नहीं हैं। बाल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे नौनिहाल खुले में ही शौच जाते देखे गए। स्वच्छता दिवस पर महिला एवं बाल विकास विभाग लोगों को तो जागरूक करने का कार्य कर रहा है।
लेकिन अपने आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय उपलब्ध करवाने में नाकाम साबित हुआ है। नगर परिषद ज्वालामुखी के तहत आधा दर्जन के करीब आंगनबाड़ी केंद्र सामुदायिक भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
न के बराबर मिल रही हैं सुविधाएं
इन भवनों में अब तक बच्चों के लिए शौचालय निर्माण नहीं हो पाया है। नगर परिषद की ओर से ज्वालामुखी शहर के हर वार्ड में सामुदायिक भवन बनाए गए थे। इन पर लाखों खर्च किए गए थे। मौजूदा समय में सामुदायिक भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र में सुविधाएं नाकाफी हैं।
शहरवासियों और समाजसेवी चरणदास सूद, प्रताप चौधरी, सतीश, मदन और रमेश आदि का कहना है कि शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों में शौचालय की व्यवस्था विभाग को अनिवार्य करनी चाहिए। नौनिहालों को मजबूरन खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। यह देश के लिए शर्मिंदगी जैसा है। स्वच्छता मिशन भी तभी कामयाब होगा जब शैक्षणिक संस्थानों में शौचालय होंगे।
कुछ करने को तैयार नहीं महकमा
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी महेश दत्त का कहना है कि यह गंभीर विषय है। इसकी पूरी जानकारी के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। सामुदायिक भवनों में किन वजहों से आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, इसका पता किया जाएगा।
वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग तिलक राज आचार्य का कहना है कि कुछेक आंगनबाड़ी केंद्रों को संबंधित इलाकों के भवनों में चलाया जा रहा है। इनमें से कइयों में शौचालय नहीं हैं। यहां भी शौचालय सुविधा दिए जाने को लेकर स्वच्छ भारत अभियान के तहत कार्यक्रम शुरू किया गया है। इस पर एडीसी धर्मशाला के साथ बैठक के बाद ही आगामी निर्णय लिया जाएगा।