12वीं के बाद ही हिमाचल से बाहर करें पढ़ाई नहीं तो पड़ेगा पछताना, होगा बड़ा नुकसान
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बाहरी राज्यों में पढ़े हिमाचल के बच्चों के लिए एमबीबीएस और बीडीएस में स्टेट कोटा खत्म कर दिया है। कोटे के लिए अब आठवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं की चार परीक्षाओं में से दो हिमाचल से पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। सूबे से बाहर प्राइवेट नौकरी या कारोबार करने वाले हिमाचलियों के बच्चों पर यह शर्त लागू होगी।
सरकारी कर्मचारियों और जवाहर नवोदय विद्यालय के बच्चों पर यह शर्त लागू नहीं होगी। प्रदेश सरकार ने एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश के हिमाचल कोटे की पात्रता शर्तों में बदलाव कर दिया है। अभी तक हिमाचल मूल के सभी लोग सूबे के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों की सीटों के स्टेट कोटे के लिए पात्र होते थे।
राज्य के बाहर प्राइवेट नौकरी-कारोबार करने वाले हिमाचलियों के बच्चे स्टेट कोटे से एमबीबीएस और बीडीएस में आवेदन करते थे। भले ही उन्होंने पढ़ाई बाहरी राज्यों से ही क्यों न की हो। पात्रता नियमों में बदलाव के पीछे सरकार का तर्क है कि इससे प्रदेश में पढ़े होनहारों को मौका मिल सकेगा।
इन्हें रहेगी आवेदन की छूट
नीट पास अभ्यर्थियों के अभिभावक अनिल, विक्रम सिंह और पवन कुमार ने बताया कि वे दिल्ली और हरियाणा में नौकरी करते हैं। उनका परिवार उनके साथ ही रहता है। उनके बच्चे भी वहीं पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे रोजी-रोटी के लिए हिमाचल से बाहर रहते हैं, लेकिन मूल रूप से हिमाचली हैं। ऐसे में उनके बच्चों से हिमाचली कोटा नहीं छीना जा सकता।
इन्हें रहेगी आवेदन की छूट- वे मूल हिमाचली जो केंद्र सरकार, प्रदेेश के विभागों, अर्धसरकारी विभागों, सेना में सेवारत और पूर्व सैनिक, जो प्रदेश के बाहर सेवा दे चुके हैं या दे रहे हैं, उनके बच्चे अगर बाहर पढ़े हैं तो भी उन्हें पात्रता शर्तों में छूट है। इसके अलावा बाहरी राज्यों में नवोदय स्कूल से पढ़ाई करने वाले भी स्टेट कोटा की सीट के लिए नीट परीक्षा पास करने पर पात्र होंगे।