प्रबंधन ने लिया फैसला, बिजली बोर्ड कर्मचारियों को बड़ी राहत
राज्य बिजली बोर्ड की 48 श्रेणियों के कर्मचारियों से अब रिकवरी नहीं होगी। बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ की मांग पर बोर्ड प्रबंधन ने वेतन विसंगतियां दुरुस्त करने के लिए शुरू की रिकवरी को अगले आदेशों तक रोक दिया है। निदेशक वित्त ने इस बाबत मंगलवार को आदेश जारी कर दिए हैं। बिजली बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल की मंगलवार को बोर्ड प्रबंधन के साथ बैठक हुई।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल ठाकुर ने बताया कि वेतन विसंगतियों के चलते सैकड़ों कर्मचारियों के वेतन में कटौती कर दी गई थी। प्रबंधन के समक्ष इस मामले को लगातार उठाया गया। जिसके चलते मंगलवार को संघ और प्रबंधन के बीच लिखित समझौता हुआ। उन्होंने बताया कि प्रबंधन से पदोन्नति आदेशों में दो साल के प्रोवेशन पीरियड को भी सरकार के आदेशों की तर्ज पर कार्यान्वित करने का फैसला हुआ है।
उन्होंने बताया कि तीन जनवरी को प्रस्तावित संघ के धरने को छह जनवरी तक स्थगित कर दिया गया है। पांच जनवरी को बोर्ड प्रबंधन ने मांगों का स्थाई हल करने का आश्वासन दिया है। इस बैठक के बाद संघ आगामी रणनीति तय करेगा। प्रतिनिधिमंडल में संघ के महामंत्री दुनी चंद ठाकुर, नेकराम ठाकुर, शाली ग्राम, सुरेंद्र, खूबचंद, लक्ष्मण कपटा, मदन ठाकुर, रणवीर ठाकुर, अनिल, जय कृष्ण शर्मा सहित कई अन्य शामिल रहे।
संशोधन विधेयक के खिलाफ 8 को धरना देंगे बिजली कर्मी
बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ आठ जनवरी को देश भर में बिजली कर्मचारी धरना देंगे। इस दौरान बिजली बोर्ड के मंडल, वृत्त और मुख्य अभियंता स्तर के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाएंगे। स्टेट इलैक्ट्रिसिटी बोर्ड इंप्लाइज यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि शीत सत्र में पारित करने के लिए केंद्र सरकार संशोधन विधेयक ला रही है।
संशोधन कानून के प्रभाव में आने से बिजली बोर्ड विघटित होकर सभी कार्यों को अलग-अलग करने के साथ वितरण के कार्य को छोटी-छोटी कंपनियों में बांटा जाना तय है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की भूगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे अभी विद्युत दरें तय करते समय क्रॉस सब्सिडी को कम किया जा रहा है।
इस कानून के पारित होने से दूरदराज क्षेत्रों में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होगी। ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बिजली मापने के लिए जगह-जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों व बिजली के फीडरों को अलग-अलग करने का खर्च भी उपभोक्ताओं को वहन करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि औद्योगिक व अन्य राजस्व वाले क्षेत्र निजी हाथों में चले जाएंगे। इसका सीधा असर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
जहां बड़े उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी। अन्य उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी और विद्युत दरें बढ़ेंगी। यूनियन के महासचिव हीरालाल वर्मा ने बताया कि बोर्ड कर्मचारियों की अन्य मांगों को लेकर भी प्रदर्शन के दौरान उठाया जाएगा।