खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के प्रिंसिपलों के लिए बुरी खबर, रुकेगी इंक्रीमेंट
नौ बिंदुओं को लेकर बोर्ड से जानकारी मांगी गई है। इस ब्यौरे के आधार पर 25 फीसदी से कम परिणाम देने वाले स्कूलों की समीक्षा की जाएगी। शून्य परिणाम देने वाले स्कूलों के प्रिंसिपलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बोर्ड कक्षाओं में बेहतर नतीजे नहीं देने वाले शिक्षकों पर दबाव बनाने का दौर फिर शुरू हो गया है। बीते साल भी शिक्षा विभाग ने खराब परिणाम देने वाले शिक्षकों को सस्पेंड करने, इंक्रीमेंट रोकने और तबादले करने की चेतावनियां दी गईं थी। लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं किया गया था।
दरअसल राज्य में शिक्षकों का सबसे बड़ा कैडर है। ऐसे में सरकार शिक्षकों पर हाथ डालने का दम नहीं भर पाती। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस साल सरकार बोर्ड परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन नहीं करने वाले सरकारी शिक्षकों पर कोई कार्रवाई कर पाती है या बीते साल की तरह कार्रवाई करने के सभी दावे सिर्फ कोरे ही साबित होंगे।
विभाग ने बोर्ड से मांगी ये जानकारियां
उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव को लिखे पत्र में दसवीं और जमा दो कक्षा का ओवर ऑल पास परसेंटेज का ब्योरा मांगा है। इसके अलावा पूछा गया है कि कितने बच्चों के 60 फीसदी से अधिक अंक आए हैं? टॉप 500 बच्चे कौन हैं? टॉप 50 में कौन बच्चे हैं?
थर्ड डिविजन में कितने बच्चे पास हुए हैं? कितने स्कूलों का परीक्षा परिणाम 80 से 100 फीसदी के बीच है? कितने स्कूल का परिणाम शून्य से 25 फीसदी के बीच है? कितने स्कूलों का परिणाम 26 से 50 फीसदी के बीच है? सभी विषयों में अलग-अलग परिणाम किस तरह का है?