नीति आयोग की बैठक: सीएम जयराम बोले- हिमाचल को उदार वित्तीय मदद की जरूरत
जयराम ठाकुर ने कहा कि नीति आयोग की यह कार्यशाला पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर चर्चा के अतिरिक्त विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के पास लंबित मामलों के निपटान में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्हाेंने विश्वास जताया कि नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल और उनके सहयोगी इन मामलों का जल्द हल निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।
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सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक राजस्व घाटे वाला राज्य है और विभिन्न आधारभूत संरचना परियोजनाओं में निवेश के लिए राज्य के पास सीमित साधन हैं। ऐसे में कई परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए उदार सहायता की जरूरत है। राज्य में रेल संपर्क बढ़ाने पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसमें भू-अधिग्रहण सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने यह बात आर्म्सडेल भवन में नीति आयोग और अन्य केंद्रीय सदस्यों के साथ हुई बैठक में कही।
जयराम ठाकुर ने कहा कि नीति आयोग की यह कार्यशाला पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर चर्चा के अतिरिक्त विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों के पास लंबित मामलों के निपटान में भी सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल और उनके सहयोगी इन मामलों का जल्द हल निकालने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। कार्यशाला में नीति आयोग के फेलो अरविंद मेहता, अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय गुप्ता, आरडी धीमान और जेसी शर्मा, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, नीति आयोग की प्रतिनिधि सुदेंधु ज्योति सिन्हा, डॉ. नीना भाटिया, हेमंत मीणा, यूनिसेफ, एसएएस, सीएचआरडी के प्रतिनिधि व अन्य अधिकारी कार्यशाला में उपस्थित थे।
सुझावों और सिफारिशों को लागू करेगी सरकार : रामसुभग
मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने कहा कि राज्य सरकार नीति आयोग के सदस्य की ओर से दिए गए सुझावों और सिफारिशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी। प्रदेश स्वस्थ एवं खुशहाल हिमाचल के लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त करेगा।
कुपोषण से निपटने के लिए बनाएंगे योजना : सक्सेना
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपने बजट में कहा है कि सरकार बच्चों में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए विस्तृत अध्ययन कर एक कार्ययोजना तैयार करेगी।
कुपोषण खत्म करने की रफ्तार धीमी, नीति आयोग ने जताई नाराजगी
कुपोषण मिटाने में हिमाचल की रफ्तार कम होने पर नीति आयोग ने मंगलवार को शिमला में नाराजगी जताई है। राज्य सचिवालय के आर्म्सडेल भवन में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, मुख्य सचिव रामसुभग सिंह और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष नीति आयोग के सदस्य ने सलाह दी कि इस पर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की पॉजिटिव दर दो होने के दृष्टिगत भी जिला और निचले स्तर पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने मंगलवार को राज्य सरकार और नीति आयोग की पोषण और सहकारी संघवाद विषय पर कार्यशाला को संबोधित किया। कहा कि राज्य ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति भी की है, लेकिन यहां एनीमिया की समस्या चिंताजनक है। उन्होंने कम वजन वाले शिशुओं पर विशेष अभियान शुरू करने की सलाह दी। वर्ष 2024 तक ओआरएस और जिंक से डायरिया से होने वाली मृत्यु को शून्य करने का लक्ष्य दिया। पूरक आहार के पूरी तरह से घर-घर न पहुंचने पर चिंता जताई। इसके लिए जन आंदोलन और एनीमिया मुक्त हिमाचल मिशन को तेज करने को कहा। वर्ष 2023-24 तक राज्य को टीबी मुक्त बनाने पर भी बल दिया।
शत-प्रतिशत टीकाकरण, मातृ वंदना योजना की उपलब्धियों पर सराहा
नीति आयोग के सदस्य ने लक्षित पात्र आयु वर्ग के शत-प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हिमाचल प्रदेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी बेहतर है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्होंने मातृ वंदना योजना के तहत राज्य सरकार की उपलब्धियों की भी सराहना की। इस अवसर पर नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव डॉ. राकेश सरवाल ने देश और हिमाचल प्रदेश में विभिन्न सामाजिक संकेतकों के संबंध में प्रस्तुति दी।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष अभियान शुरू होगा: सीएम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर विशेष अभियान शुरू होगा। पोषण को एक जन आंदोलन बनाने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक जागरूकता लाएंगे। 18,925 आंगनबाड़ी और 5,99,643 लाभार्थियों को पोषण ट्रैकर पर पंजीकृत किया जा रहा है। अति कुपोषित एवं मध्यम कुपोषित बच्चों के प्रबंधन के लिए हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से मानक संचालन प्रक्रिया बनाई है।