NGT: हिमाचल में भवन निर्माण करने वाले हो जाए सावधान, लगेगा पांच लाख जुर्माना
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हिमाचल में यदि आप अपना आशियाना बनाने की सोच रहे हैं तो इस खबर को जरा ध्यान से पढ़ लें। एनजीटी ने प्रदेश में भवन निर्माण को लेकर सख्त आदेश पारित किए हैं।
हिमाचल में बिना मंजूरी कहीं भी पहाड़ या पेड़ काटने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगेगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वीरवार को बड़ा फैसला लेते हुए सूबे में राष्ट्रीय राजमार्ग और अन्य सड़कों के दोनों किनारे 3 मीटर तक किसी तरह का निर्माण नहीं किया सकेगा।
शिमला और उसके आसपास के क्षेत्रों में ढाई मंजिल से ऊंचे भवन निर्माण पर भी रोक लगा दी है। साथ ही शिमला प्लानिंग एरिया में किसी भी कोने में मौजूद सघन वन या हरित क्षेत्र में नए आवासीय, संस्थागत और व्यावसायिक निर्माण की अनुमति नहीं होगी।
यह कड़ा फैसला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुनाया है। प्रधान पीठ ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा है कि विकास के नाम पर विनाश को दावत नहीं दी जा सकती।
इन भवनों के निर्माण को मिलेगी छूट
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिमाचल सरकार की ओर से अंतरिम विकास योजना के तहत जारी कई गई तमाम अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए सघन वन या हरित क्षेत्र में नए निर्माण पर प्रतिबंध लगाया है।
पीठ ने कहा कि सघन हरित या वन क्षेत्र के बाहर का ऐसा इलाका, जो शिमला प्लानिंग एरिया के प्राधिकरणों के अधीन आता है, वहां निर्माण बेहद कड़ी शर्तों और मौजूदा कानूनों (टीसीपी कानून, विकास योजना, नगरीय कानूनों) के आधार पर ही संभव होगा।
ऐसे क्षेत्र में दो मंजिला भवन से अधिक नहीं बनाया जा सकेगा। सिर्फ सरकारी हॉस्पिटल, स्कूल और जरूरी कार्यालयों को इससे छूट होगी। इसके लिए गठित सुपरवाइजरी कमेटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र व अनुमति भी लेनी होगी।
पुरानी आवासीय संरचना पर ये लेगा निर्णय
पीठ ने कहा कि यदि किसी सघन वन क्षेत्र या हरित क्षेत्र में कोई पुरानी आवासीय संरचना मौजूद है तो कमेटी ही उसके पुनर्निर्माण या अन्य निर्माण कार्य को लेकर निर्णय लेगी। पीठ ने हरित या सघन वन क्षेत्र में मौजूद अवैध निर्माण को गिराने का भी आदेश दिया है।
फैसले से पहले आवेदन वाले मामलों में अंतिम मंजूरी के लिए पर्यावरणीय जुर्माने की वसूली होगी। पेड़ या पहाड़ कटान में यदि कोई जुर्माने की राशि देने में विफल होता है तो राज्य सरकार के भू राजस्व से यह राशि वसूली जाएगी। एनजीटी ने शिमला में प्लास्टिक बैग के प्रतिबंध को भी फिर से दोहराया है।
अमल के लिए निगरानी और कार्यान्वयन समिति
आदेश पर अमल के लिए निगरानी और कार्यान्वयन समिति गठित की गई हैं। निगरानी समिति में हिमाचल प्रदेश के शहरी विकास सचिव, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के निदेशक, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग निदेशक, हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, संबंधित क्षेत्र के प्रोफेसर, पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज चंडीगढ़ के प्रोफेसर और संयुक्त सचिव शामिल होंगे।
कार्यान्वयन समिति के चेयरमैन टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निदेशक होंगे। स्टेट टाउन प्लान, शहरी विकास विभाग के निदेशक व शिमला नगर कमिश्नर, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी देहरादून के नामित अधिकारी व अन्य इसमें शामिल किए गए हैं।
निगरानी समिति को तीन महीने में एक बार और कार्यान्वयन समिति को हर महीने के पहले सप्ताह में बैठक करनी होगी। वहीं, उच्चस्तरीय समिति को ऐसे महत्वपूर्ण भवनों का सर्वे करने का भी आदेश दिया गया है जो भूकंप के कारण खराब हुए हैं।
ऐसे लगेगा जुर्माना
ट्रिब्यूनल ने प्रदेश के अन्य भागों में किए गए सभी तरह के अवैध निर्माणों को नियमित करने पर प्रतिबंध लगाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी ने कोर, ग्रीन और फॉरेस्ट एरिया से बाहर अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए 13 नवंबर 2017 से पहले संबंधित विभाग के पास आवेदन किया है तो उसे आवासीय
भवन के अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए पांच हजार रुपये प्रति वर्ग फुट तथा व्यवसायिक भवन के अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए दस हजार रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से पर्यावरण मुआवजा देना होगा।
यह शुल्क अन्य प्रकार के शुल्क से अलग होगा। 13 नवंबर के बाद किए किसी भी अनाधिकृत निर्माण को नियमित नहीं किया जाएगा। यह निर्माण तभी नियमित होंगे जब वह यह फीस अदा करेंगे तथा अन्य मापदंडों को पूरा करेंगे।