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फिर निकला गुड़िया मामले का जिन्न, सीबीआई को भेजा मामला

Wed, 16 Jan 2019 05:00 AM IST
ashok chauhan सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Wed, 16 Jan 2019 05:00 AM IST
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ngo sent letter to pmo in gudiya case shimla and raised question on cbi enquiry

हिमाचल के बहुचर्चित गुड़िया मामले का जिन्न फिर बाहर निकल आया है। एक स्वयंसेवी संस्था ने पीएमओ को पत्र लिखकर सीबीआई जांच पर सवाल उठाए हैं। पीएमओ के निर्देश पर केंद्रीय कार्मिक विभाग ने यह पत्र आगे सीबीआई निदेशक को उपयुक्त कार्रवाई को भेजा है।

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हालांकि, सीबीआई दुराचारी हत्यारे को पकड़ने का दावा कर कोर्ट में चालान भी पेश कर चुकी है। कोटखाई के दांदी जंगल में चार जुलाई 2017 को दसवीं कक्षा की छात्रा गुड़िया (काल्पनिक) का दुराचार के बाद कत्ल हो गया।
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पुलिस कार्रवाई से असंतोष जता लोग सड़कों पर उतरे। आरोपी बनाए एक नेपाली सूरज की कोटखाई थाने मेें हत्या हुई। मामला सीबीआई दिल्ली को दिया गया। सीबीआई ने पुलिस हिरासत वाली
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हत्या के आरोप में आईजी, एसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी से लेकर कांस्टेबल तक नौ पुलिसवाले गिरफ्तार किए। दुराचार और हत्या के आरोप में डीएनए के मिलान का दावा कर साढे़ चार फुट के एक चिरानी को पकड़ा गया।

जांच पर असंतोष जताकर दखल की मांग

ngo sent letter to pmo in gudiya case shimla and raised question on cbi enquiry

स्वयंसेवी संस्था मदद सेवा ट्रस्ट शिमला की अध्यक्ष तनुजा थाप्टा ने ‘गुड़िया : एक अनसुनी चीख’ नाम से लिखी किताब प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजी। पीएमओ के निदेशक चंद्रेश सोना ने तनुजा को पावती पत्र भेजा।

तनुजा ने चंद्रेश सोना को फिर पत्र लिखा, जिसमें सीबीआई जांच पर असंतोष जताकर इसमें दखल की मांग की। अब पीएमओ के निर्देश पर केंद्रीय कार्मिक विभाग के अवर सचिव एसपीआर त्रिपाठी ने सीबीआई निदेशक को उपयुक्त कार्रवाई को पत्र (डीओपीटी एफ नं. 245/60/2018-एवीडी-2-ई-फाइल) लिखा है। 

तनुजा थाप्टा ने उठाए ये सवाल 

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तत्कालीन मुख्यमंत्री केे  ऑफिशियल पेज पर कुछ तस्वीरें जारी की गईं। मामला हल होने तक का दावा किया गया, मगर उन चेहरों का सीबीआई जांच में कहीं भी जिक्र नहीं 

पुलिस हिरासत में पति सूरज को खोने वाली ममता ने सनसनीखेज जानकारियां साझा कीं, उससे भी गहन पूछताछ की जरूरत थी जो नहीं हुई 
ममता का भी पोलीग्राफ टेस्ट होना चाहिए था 

सीबीआई ने डीएनए मिलान के लिए खून के जांच नमूनों को लेने में जल्दबाजी दिखाई। जब  आरोपी पकड़ा गया, उसकी ब्रेन मैपिंग नहीं की गई 

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