देश में नशे के सेवन पर चौंकाने वाला खुलासा, पंजाब सबसे आगे
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नशे के सेवन को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। देश में 7.3 करोड़ लोग नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं जिसमें 70 प्रतिशत अधिक मात्रा में नशे के आदि हैं। हिमाचल के पड़ोसी राज्य पंजाब की हालत पूरे देश में सबसे बदतर है। पंजाब की जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग नशे से ग्रसित हैं यानी 10 लाख लोग नशे की चपेट में हैं।
भारत में नशा करने वालों में युवा पीढ़ी है। जिसमें से अधिकतर 18 वर्ष के नौजवान ही नशे की चपेट में हैं। नशीले पदार्थों का व्यापार तेजी से बढ़ रहा है जो आज लगभग 500 बिलियन डॉलर को पार चुका है।
यह खुलासा हिमाचल में नशे को लेकर चल रहे राष्ट्रीय सेमीनार में हुआ है। समय रहते सरकारों को भी गंभीरता से कदम उठाने होंगे ताकि नशीले पदार्थों के गैर कानूनी धंधों को जड़ से समाप्त किया जाए। कानून में नशे का कारोबार करने वालों के लिए कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान किया जाए।
विश्व का तीसरा बड़ा कारोबार बना नशा
हिमाचल में भी नशे का सेवन और कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। प्रदेश में 31 मई 2015 तक एनडीपीएस के 4366 मामले दर्ज हैं जिसमें 1320 मामले मंडी तथा कुल्लू में 871 मामले दर्ज हैं। मनाली में चल रही इस सेमिनार में हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश राजीव शर्मा ने भी अपने विचार रखे। दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश इस सेमीनार में हिस्सा ले रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा कि नशा बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। आज देखा यह जा रहा है कि केवल एक मजदूर और गरीब ही पकड़ा जा रहा है। वे लोग आज भी पकड़ से बाहर हैं, जो नशीले पदार्थों के सरगना हैं। इन पर नकेल कसना जरूरी है।
हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर ने कहा कि आज पूरे विश्व में नशीले पदार्थों का कारोबार पांच हजार विलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर गया है, जो पेट्रोलियम और हथियारों के कारोबार के बाद विश्व में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
कड़े कानूनों की जरूरत
यूथ नशे की दलदल में न फंसे इसके समाधान के लिए वीरवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा समेत देश भर के न्यायाधीश मनाली में जुटे। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने इस राष्ट्रीय सेमीनार का शुभारंभ किया।
समाज को बचाने के लिए सेमिनार में नशे के खिलाफ अभियान छेड़ने और जन जागरण पर बल दिया गया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि नशे पर पाबंदी के लिए कड़े कानून बनने चाहिए। देश में नशीले पदार्थों का कारोबार बढ़ रहा है। पड़ोसी देशों से भी नशीले पदार्थों की तस्करी बढ़ रही है, यह चिंता की बात है। वीरभद्र ने कहा कि प्रदेश सरकार मलाणा और अन्य स्थानों में चरस को रोकने के लिए कड़ाई से काम कर रही है। हर वर्ष हजारों एकड़ भूमि से भांग को उखाड़ा जा रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार कड़े कानून बना रही है। नशे से ग्रस्त लोगों के उपचार के लिए एम्स, पीजीआई चंडीगढ़, बंगलूरू और अन्य बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में अलग यूनिट बनाए हैं। उन्होंने कहा कि इस सभा में जो भी सुझाव आएंगे, सरकार उस पर अमल करेगी।