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Shimla News: आईजीएमसी में जल्द शुरू होगी नई एमआरआई मशीन
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नई थ्री टेस्ला मशीन से मरीजों को मिलेगी, अब स्कैन के लिए नहीं करना पड़ेगा 3 से चार महीने तक इंतजार
मरीजों को समय पर मिलेगी स्कैन की रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में नई थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगले महीने से यह मशीन मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस अत्याधुनिक मशीन के लगने के बाद मरीजों को एमआरआई जांच के लिए तीन से चार महीने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अभी तक 15 साल पुरानी मशीन की सीमित क्षमता और बार-बार तकनीकी खराबी के कारण मरीजों को लंबी कतारों में लगकर इंतजार करना पड़ता है। कई बार मरीजों को जांच की तारीख चार महीने बाद की मिलती है। गंभीर रोगियों को मजबूरन निजी अस्पतालों में जांच करवानी पड़ती थी जहां खर्च अधिक आता था। आईजीएमसी में रोजाना सैकड़ों मरीज एमआरआई जांच के लिए आते हैं। एक पुरानी मशीन पर इतना दबाव था कि रोजाना केवल सीमित संख्या में ही जांच हो पाती थी। अब नई मशीन के शुरू होते ही प्रतिदिन दोगुनी संख्या में मरीजों की जांच संभव होगी। इससे मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल सकेगी और डॉक्टर भी तुरंत उपचार शुरू कर पाएंगे। खासकर कैंसर, रीढ़, हड्डी और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का समय पर पता चल पाएगा।
उच्च तकनीक वाली है मशीन
थ्री-टेस्ला मशीन उच्च तकनीक वाली है। इससे जांच की तस्वीरें और ज्यादा स्पष्ट होंगी। ऑर्थोपेडिक्स और ऑन्कोलॉजी जैसे विभागों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। पहले जहां रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते थे वहीं अब तुरंत परिणाम मिल सकेंगे। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जांच का समय कम होगा और ज्यादा से ज्यादा मरीजों के टेस्ट किए जा सकेंगे। नई मशीन के अगले हफ्ते से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद मरीजों को लंबी कतारों और महीनों तक इंतजार की परेशानी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
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मरीजों को समय पर मिलेगी स्कैन की रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में नई थ्री-टेस्ला एमआरआई मशीन लगाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अगले महीने से यह मशीन मरीजों के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस अत्याधुनिक मशीन के लगने के बाद मरीजों को एमआरआई जांच के लिए तीन से चार महीने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
अभी तक 15 साल पुरानी मशीन की सीमित क्षमता और बार-बार तकनीकी खराबी के कारण मरीजों को लंबी कतारों में लगकर इंतजार करना पड़ता है। कई बार मरीजों को जांच की तारीख चार महीने बाद की मिलती है। गंभीर रोगियों को मजबूरन निजी अस्पतालों में जांच करवानी पड़ती थी जहां खर्च अधिक आता था। आईजीएमसी में रोजाना सैकड़ों मरीज एमआरआई जांच के लिए आते हैं। एक पुरानी मशीन पर इतना दबाव था कि रोजाना केवल सीमित संख्या में ही जांच हो पाती थी। अब नई मशीन के शुरू होते ही प्रतिदिन दोगुनी संख्या में मरीजों की जांच संभव होगी। इससे मरीजों को समय पर रिपोर्ट मिल सकेगी और डॉक्टर भी तुरंत उपचार शुरू कर पाएंगे। खासकर कैंसर, रीढ़, हड्डी और दिमाग से जुड़ी बीमारियों का समय पर पता चल पाएगा।
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उच्च तकनीक वाली है मशीन
थ्री-टेस्ला मशीन उच्च तकनीक वाली है। इससे जांच की तस्वीरें और ज्यादा स्पष्ट होंगी। ऑर्थोपेडिक्स और ऑन्कोलॉजी जैसे विभागों को इससे सीधा लाभ मिलेगा। पहले जहां रिपोर्ट आने में कई दिन लग जाते थे वहीं अब तुरंत परिणाम मिल सकेंगे। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जांच का समय कम होगा और ज्यादा से ज्यादा मरीजों के टेस्ट किए जा सकेंगे। नई मशीन के अगले हफ्ते से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद मरीजों को लंबी कतारों और महीनों तक इंतजार की परेशानी से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा।
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