जिसे मृत समझ छोड़ा, 12 घंटे माइनस तापमान में रहकर भी निकला जीवित
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जिस नेपाली को बर्फ के बीच मृत समझकर साथी शिंकुला दर्रे में ही छोड़ कर चले आए थे, वह करीब 12 घंटे बाद भी माइनस तापमान में जीवित निकला। शनिवार को नेपाली मजदूर शशि (55) का शव लाने हिमाचल और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर शिंकुला दर्रे पर पहुंचे दो नेपाली दीपक खत्री और सोनम ये देखकर हैरान रह गए कि शशि की सांसें चल रही हैं। उन्होंने तुरंत उसे लाकर केलांग अस्पताल में भर्ती कराया गया, वहां से उसे कुल्लू रेफर कर दिया।
जानकारी के अनुसार ताजा बर्फबारी के बाद जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले के करग्या से लाहौल की तरफ 22 नेपाली मजदूरों का एक दल निकला था। खाना खत्म होने के बाद भूखे पेट तीन दिन से लगातार पैदल चलने के बाद हिमाचल की सीमा में प्रवेश करते ही एक नेपाली बेसुध होकर गिर पड़ा। बातचीत न करने पर दल के लोगों ने उसे मरा समझ कर वहीं छोड़ दिया।
आधी रात को सुरक्षित केलांग पहुंचे डीसी समेत टीम
अपनी जान बचाने के लिए अन्य मजदूर आगे बढ़ते गए। दारचा के समीप रेस्क्यू दल के तेंजिन कारपा, विजय व मनु ने इन्हें केलांग तक पहुंचाया। साथियों ने आशंका जाहिर की थी कि भूख व ठंड के कारण उनके साथी की मौत हो गई, लेकिन शनिवार को मौसम साफ होने पर दो नेपाली मजदूर शव लाने वापस गए तो जिसे मृत समझ वहीं छोड़ आए थे, उसकी सांस चलती देख दंग रह गए।
युवाओं ने उसे पीठ पर उठाकर सुरक्षित निकाला। केलांग में प्राथमिक उपचार के बाद नेपाली मजदूर को कुल्लू क्षेत्रीय अस्पताल रेफर कर दिया है। गत शुक्रवार को बारालाचा की तरफ रेस्क्यू को गए डीसी समेत आठ कर्मचारी पटसेउ में बर्फ व पत्थर गिरने की वजह से फंस गए थे। जिन्हें कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार रात को निकाला गया।