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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Natural farming will be included in the curriculum of the College of Agriculture

Kangra: कृषि महाविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल होगी प्राकृतिक खेती

Mon, 17 Oct 2022 09:09 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Mon, 17 Oct 2022 09:09 PM IST
सार

 प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर और इसके बड़े पैमाने के उत्पादन को लेकर आईसीएआर ने पाठ्यक्रम की एक रुपरेखा तैयार की है। जिसे जल्द ही कृषि महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

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Natural farming will be included in the curriculum of the College of Agriculture
कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कीटनाशक दवाइयों और रासानियक खादों से लगातार व्यक्ति के शरीर को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए अब कृषि महाविद्यालयों में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जोर दिया जाएगा। प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर और इसके बड़े पैमाने के उत्पादन को लेकर आईसीएआर ने पाठ्यक्रम की एक रुपरेखा तैयार की है। जिसे जल्द ही कृषि महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए किसानों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि किसान प्राकृतिक खेती को अपने खेतों तक ले जा सकें। कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति प्रो. एचके चौधरी ने कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के सम्मेलन में यह जानकारी रखी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम की रूपरेखा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से  तैयार की गई थी।

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इसे प्राकृतिक खेती में उत्पादन और अनुसंधान के अभ्यास के लिए अगले शैक्षणिक सत्र से पेश किए जाने की संभावना है। उन्होंने  कहा कि जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों की जगह रासायनिक खेती ने ले ली है। भारत सरकार ने प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर दिया है और परिणामस्वरूप आईसीएआर ने कृषि शिक्षा के पाठ्यक्रम में प्राकृतिक खेती को शामिल करने का निर्णय लिया है। प्राकृतिक खेती पर अधिक जनशक्ति और किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए, कृषि विज्ञान केंद्रों को आईसीएआर की ओर से यह काम सौंपा गया है। प्राकृतिक खेती के लिए प्रमुख फसलों का परीक्षण बहु-स्थानों पर किया जाएगा। कुलपति ने कहा कि कृषि विवि पालमपुर  पहले से ही पहाड़ी राज्य की फसलों के संदर्भ में प्राकृतिक खेती पर काम कर रहा है। हालांकि, प्राकृतिक खेती को लेकर कृषि विवि पालमपुर में पहले ही काम किया जा रहा है। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों और किसानों को प्रशिक्षण भी दिया गया था।

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