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हिमाचल: बुरांस के पेड़ सुखाने वाले पतंगे का मिला प्राकृतिक दुश्मन, वैज्ञानिकों ने खोजी नई ततैया प्रजाति

Wed, 30 Sep 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh सोमदत्त शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन।
सोमदत्त शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 30 Sep 2026 06:00 AM IST
सार

 भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) और पद्मजा नायडू हिमालयी प्राणी उद्यान के वैज्ञानिकों ने दार्जिलिंग के जंगलों में इस पतंगे के अंडों को नष्ट करने वाली ततैया की एक नई प्रजाति टेलेनोमस अल्टिकोलस की खोज की है।

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Natural enemy of the Gajalina chrysolopha moth killing Burans trees found; scientists discover new wasp specie
अब नहीं सुखेंगे बुरांस के पेड़। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल, उत्तराखंड और दार्जिलिंग सहित हिमालयी क्षेत्रों में बुरांस के सैकड़ों पेड़ों को सुखा रहे खतरनाक गैजालिना क्राइसोलोफा पतंगे से निपटने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) और पद्मजा नायडू हिमालयी प्राणी उद्यान के वैज्ञानिकों ने दार्जिलिंग के जंगलों में इस पतंगे के अंडों को नष्ट करने वाली ततैया की एक नई प्रजाति टेलेनोमस अल्टिकोलस की खोज की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह गैजालिना क्राइसोलोफा के अंडों का दुनिया में दर्ज पहला परजीवी है। दो वर्ष चले अध्ययन में सामने आए इस प्राकृतिक शत्रु से बुरांस और हिमालयी एल्ड जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों को पतंगे के प्रकोप से बचाने की नई उम्मीद जगी है। 

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पतंगा सैकड़ों पेड़ों की टहनियों और पत्तों से रस चूसकर उन्हें सुखा रहा: अध्ययन
अध्ययन के निष्कर्ष हाल ही में बायोकंट्रोल साइंस एंड टेक्नोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं। यह अध्ययन सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान में बुरांस के पेड़ाें पर गैजालिना क्राइसोलोफा पतंगे के प्रकोप के बाद किया गया था। यहां पर पता चला कि यह पतंगा वहां पर सैकड़ों पेड़ों की टहनियों और पत्तों से रस चूसकर उन्हें सुखा रहा है। वैज्ञानिकों ने कीट के विभिन्न चरणों से जुड़े जीवों की गहन जांच की। इस अध्ययन से विज्ञान में एक नई प्रजाति और एक अज्ञात मेजबान-परजीवी संबंध का पता चला है। यह ततैया छोटे सहयोगी पेड़ों, पशुधन संसाधनों और आर्थिक रूप से मूल्यवान फसलों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 

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 बुरांस और हिमालयी एल्ड पर पतंगे का खतरा
गैजालिना क्राइसोलोफा एक बहुभक्षी पतंगा है, जो बुरांस और हिमालयी एल्ड के पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा था। ये दोनों पेड़ हिमालयी क्षेत्र के पारिस्थितिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। बुरांस हिमाचल और उत्तराखंड सहित कई हिमालयी राज्यों का राज्य वृक्ष है। इसके फूलों से जूस, वाइन और चटनी जैसे कई उत्पाद बनाए जाते हैं। हिमालयी एल्ड का पेड़ बड़ी इलायची की खेती के लिए महत्वपूर्ण छायादार वृक्ष है। यह पतंगा इन पेड़ों को काफी क्षति पहुंचा रहा था।

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मनुष्य के लिए भी खतरनाक है पतंगा
अध्ययन में पता चला है कि यह पतंगा मनुष्यों के लिए भी हानिकारक है। इसकी वयस्क मादाओं से मनुष्यों में गंभीर आंखों का संक्रमण हो सकता है। यदि पशु गलती से इसे खा लें तो उनका दम घुटने से मौत हो सकती है। जांच में पतंगे से जुड़े कुछ अन्य प्राकृतिक शत्रु भी सामने आए हैं। इनमें स्कटल फ्लाई मेगासेलिया स्केलेरिस और तीन प्रकार के एंटोमोपैथोजेनिक कवक शामिल हैं। ये कवक संक्रमित लार्वा को मार देते हैं, जिससे पतंगे के प्राकृतिक रोगजनक परिसर का हिस्सा होने का संकेत मिलता है। नौणी विश्वविद्यालय सोलन के वैज्ञानिकों ने कुछ समय पहले शोध किया था कि बुरांस के पेड़ निचले क्षेत्रों में सूख रहे हैं और अब ऊपरी क्षेत्रों में ही नए पेड़ उग रहे हैं। हालांकि, इसमें यह दावा नहीं किया गया था कि इन पेड़ों के सूखने का क्या कारण है।

इन्होंने किया मिलकर शोध
यह शोध पल्लव चटर्जी, रूपम देबनाथ, कब्बिनाहल्ली पुट्टेगौड़ा दिनेश, बसवराज होलेयाची, केलोथ राजमोहना और नवनीत सिंह ने किया। उन्होंने भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और पद्मजा नायडू हिमालयी प्राणी उद्यान के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर यह अध्ययन पूरा किया। इस अध्ययन को पश्चिम बंगाल चिड़ियाघर प्राधिकरण और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग-विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड से समर्थन प्राप्त हुआ।

दार्जिलिंग समेत हिमालयी क्षेत्रों में गैजालिना क्राइसोलोफा पतंगे की प्रजाति बुरांस और हिमालयी एल्ड प्रजाति के पेड़ों को नुकसान पहुंचा रही था। इसने सिंगालीला राष्ट्रीय उद्यान में सैकड़ों पेड़ों को सुखा दिया था। दो साल तक चले अध्ययन में दुनिया का पहला अंडा परजीवी टेलेनोमस अल्टिकोलस ततैया की प्रजाति वैज्ञानिकों को मिली है। जो पतंगे के अंडों में अपने अंडे लेकर उन्हें खत्म कर देता है। इससे अब बुरांस के पेड़ों के लिए बना खतरा खत्म हो जाएगा।- डॉ. नवनीत सिंह, प्रभारी भारतीय प्राणी सर्वेक्षण सोलन
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