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एनजीटी की तल्ख टिप्पणी, आप लोग हिमाचल प्रदेश को बरबाद करके छोड़ेंगे

Wed, 04 Jul 2018 02:01 PM IST
विवेक मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
विवेक मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Jul 2018 02:01 PM IST
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National Green Tribunal hits out at Judgement over Rohtang Pass in Himachal Pradesh

‘आप लोग हिमाचल को बरबाद करके छोड़ेंगे।’ यह तल्ख टिप्पणी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की जस्टिस जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने हिमाचल प्रदेश के मशहूर पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रा पर पर्यावरणीय नुकसान को कम करने के लिए दो वर्ष पूर्व दिए गए विस्तृत आदेशों की अपुष्ट और भ्रामक अनुपालन और स्थिति रिपोर्ट पेश किए जाने पर की। पीठ ने कहा है कि ऐसी रिपोर्ट बर्दाश्त करने लायक नहीं है।

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फिर से रिपोर्ट तलब करते हुए प्रधान पीठ ने कहा कि आखिर 18 दिसंबर, 2016 को दिए गए आदेशों के अनुपालन की स्पष्ट रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल की जा रही है। जो स्थिति रिपोर्ट हमारे सामने पेश की गई है, उनमें आंकड़ों का सिर्फ दोहराव भर है। इस बार रिपोर्ट दाखिल करने के लिए यह आखिरी मौका सरकार को दिया जा रहा है।

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सरकार ने भी नहीं दी रिपोर्ट

National Green Tribunal hits out at Judgement over Rohtang Pass in Himachal Pradesh
रोहतांग दर्रा

जस्टिस जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ स्वत: संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रही है। 18 दिसंबर 2016 को एनजीटी ने रोहतांग मामले पर अपना विस्तृत फैसला सुनाया था। साथ ही कई आदेश भी दिए थे। इनका अनुपालन अभी तक नहीं हो पाया है और न ही सरकार की ओर से अनुपालन की स्थिति रिपोर्ट दाखिल हुई है।

रोहतांग दर्रा का मामला 2013 में अदालत पहुंचा था। पर्यावरणीय मुद्दा होने के कारण इसे उच्च न्यायालय से एनजीटी में सुनवाई के लिए भेजा गया। पहली बार एनजीटी ने पर्यावरणीय पहलू पर 2014 में इस मामले पर विस्तृत आदेश दिया था।

इसके अलावा रोहतांग जाने वाले डीजल और पेट्रोल वाहनों की संख्या और 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों के रोहतांग जाने पर भी पाबंदी लगाई थी। पीठ ने अपनी चिंता में कहा था कि लगातार पिघल रहे ग्लेशियर एक बड़े संकट को दावत दे रहे हैं।

बीते वर्ष दिया था तेजी से रोप-वे परियोजना पर काम करने का आदेश

National Green Tribunal hits out at Judgement over Rohtang Pass in Himachal Pradesh

एनजीटी की प्रधान पीठ ने बीते वर्ष 20 नवंबर, 2017 को केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से पेश किए दस्तावेजों के बाद राज्य सरकार को आदेश दिया था कि वह रोहतांग के लिए रोप-वे तैयार करने और मढ़ी बाजार में चिकित्सा सुविधा के लिए तेजी लाएं।

पीठ ने कहा था कि रोप-वे बनने से निश्चित रूप से रोहतांग दर्रा पर वाहनों का बोझ कम होगा। वहीं, ग्लेशियर के पिघलने और कॉर्बन स्टॉक जैसे मुद्दे पर भी शीर्ष अधिकारियों से हर तीन महीने पर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया जा चुका है।

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