नाबार्ड क्रेडिट सेमिनार: प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का 34,490 करोड़ से होगा विकास, ऋण संभाव्यता योजना तैयार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की ओर से वित्त वर्ष 2024-25 के लिए आयोजित राज्य क्रेडिट सेमिनार का शुभारंभ किया।
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नाबार्ड ने 2024-25 के दौरान हिमाचल प्रदेश में कृषि और संबद्ध गतिविधियों, एमएसएमई और अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए 34,490.60 करोड़ रुपये की ऋण संभाव्यता योजना तैयार की है। यह ऋण प्रभाव आकलन 2024-25 के लिए राज्य बैंकिंग योजना का आधार बनेगा। ऋण प्रवाह को बीते वर्ष के मुकाबले आठ फीसदी बढ़ाया गया है। इस ऋण प्रवाह से प्राथमिकता वाले क्षेत्रों का विकास होगा। बुधवार को राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के राजधानी शिमला में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आयोजित राज्य क्रेडिट सेमिनार में यह जानकारी दी गई। सेमिनार का शुभारंभ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने किया। मुख्यमंत्री ने औपचारिक रूप से नाबार्ड स्टेट फोकस पेपर 2024-25 का विमोचन भी किया। इसके अलावा नाबार्ड के विभिन्न विकास कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए हितधारकों को सम्मानित भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने लोगों के सामजिक-आर्थिक उत्थान के लिए मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना, बागवानी के एकीकृत विकास के लिए मिशन, मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना, मुख्यमंत्री ग्रीन कवर मिशन, मुख्यमंत्री रोजगार संकल्प सेवा, मुख्यमंत्री विद्यार्थी योजना व स्टार्टअप इत्यादि अनेक कल्याण योजनाएं आरंभ की हैं। उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि इन योजनाओं के उचित क्रियान्वयन के लिए ऋण देने में सहयोग दें, ताकि किसान, बागवान तथा युवा इन योजनाओं का लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण प्रवाह पर जारी किए गए निर्देशों के तहत प्रदेश का कोई भी जिला क्रेडिट की कमी जिलों की श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि यद्यपि इन जिलों में ऋण प्रवाह सामान्य है, लेकिन प्रदेश का ऋण व जमा अनुपात 36ः39 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, ऊना, लाहौल-स्पीति व चंबा में ऋण व जमा अनुपात लगातार 40 प्रतिशत से कम है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने बैंकों एवं अन्य हितधारकों को इन जिलों में ऋण व जमा अनुपात बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाने पर बल दिया।
कीवी, ड्रैगनफ्रूट और ट्यूलिप की खेती को बढ़ावा देगा नाबार्ड
हिमाचल प्रदेश में नाबार्ड कीवी, ड्रैगनफ्रूट और ट्यूलिप की खेती को भी बढ़ावा देगा। बुधवार को राजधानी में आयोजित राज्य क्रेडिट सेमिनार को संबोधित करते हुए नाबार्ड के प्रभारी अधिकारी डॉ. विवेक पठानिया ने राज्य के लिए नाबार्ड के दृष्टिकोण को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लिलियम ओरिएंटल और ट्यूलिप की खेती के लिए प्रयोगशाला से भूमि हस्तांतरण, कीवी और ड्रैगनफ्रूट की खेती को बढ़ावा देना, उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए लक्षित सिंचाई बुनियादी ढांचे और कपास आधारित हथकरघा उत्पादों के लिए कॉर्पोरेट्स के सहयोग से काम किया जा रहा है।
कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए बैंकों, राज्य सरकार, कृषि विश्वविद्यालय, केवीके, गैर सरकारी संगठनों को वित्त पोषण सहायता प्रदान करके ग्रामीण उत्प्रेरक के रूप में नाबार्ड की भूमिका रही है। नाबार्ड पुनर्वित्त योगदान 2022-23 के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल जमीनी स्तर के ऋण संवितरण का लगभग 27 फीसदी है। इसके अलावा नाबार्ड ने आरआईडीएफ के तहत 912.00 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ राज्य के पूंजीगत व्यय परिव्यय को भी पूरक बनाया है, जो राज्य के प्रस्तावित पूंजीगत व्यय का 18 फीसदी है। यह अन्य राज्यों के औसत समर्थन से कहीं अधिक है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को पहचानते हुए बजटीय विचारों में इसके एकीकरण पर प्रकाश डाला। उन्होंने 31 मार्च 2026 तक हिमाचल प्रदेश को भारत के पहले हरित राज्य का दर्जा हासिल करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-बसों, ई-ट्रक, ई-टैक्सी) की शुरुआत के माध्यम से युवा रोजगार को बढ़ावा देने और प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश को अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने की योजना का अनावरण किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा और ई-स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए ऊना में 2 मेगावाट की क्षमता वाली पहली सौर ऊर्जा परियोजना का उद्घाटन किया गया है। इसके जल्द चालू होने की उम्मीद है। हरित हाइड्रोजन उत्पादन के लिए ऑयल इंडिया लिमिटेड के साथ एक साझेदारी की घोषणा की गई है, इसका लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को 1 मेगावाट हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने वाला भारत का पहला राज्य बनाना है। डेयरी क्षेत्र में वृद्धि के माध्यम से प्राकृतिक खेती और आजीविका में सुधार पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरआईडीएफ के तहत नाबार्ड के सहयोग से कांगड़ा में 250 करोड़ रुपये की परियोजना लागत वाले एक अत्याधुनिक डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र के स्थापना की परियोजना का अनावरण किया गया है, जिसमे प्रति दिन 3 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण की क्षमता होगी। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल सहित कई अन्य अधिकारी मौजूद रहे।