नप के भाजपा समर्थित अध्यक्ष की छुट्टी, सिर्फ पांच पार्षद साथ
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नगर परिषद सोलन में भाजपा समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ लाया अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया है। शुक्रवार को तनाव भरे माहौल में आयोजित बैठक में अविश्वास प्रस्ताव के लिए मतदान हुआ है। इसमें अध्यक्ष पवन गुप्ता के पक्ष में महज पांच और विपक्ष में दस पार्षदों ने मतदान किया। इसके साथ ही पवन गुप्ता की अध्यक्ष पद से छुट्टी हो गई।
अगले आदेशों तक नगर परिषद के अध्यक्ष पद का पदभार उपाध्यक्ष के पास रहेगा। एसडीएम सोलन एकता कापटा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में पहले सार्वजनिक मतदान करवाया जा रहा था। इसमें सभी पार्षदों को विपक्ष और पक्ष में हाथ उठाकर सहमति जतानी थी। लेकिन पूर्व अध्यक्ष पवन गुप्ता के विरोध करने पर गुप्त मतदान की प्रक्रिया को अपनाया गया।
इसमें एक पेपर पर अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष या विपक्ष में निशान लगाया जाना था। इस प्रक्रिया में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष समेत सभी 15 पार्षदों ने हिस्सा लिया। बाद में मतों की गिनती सार्वजनिक रूप से की गई। इसमें अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में दस जबकि विपक्ष में पांच मत पाए गए।
भाजपा-कांग्रेस दोनों के पार्षदों ने किया विरोध में मतदान
भाजपा समर्थित अध्यक्ष पवन गुप्ता को पद से हटाने में भाजपा और कांग्रेस दोनों के ही पार्षदों ने मतदान किया है। गौरतलब है कि करीब डेढ़ साल पूर्व जब नगर परिषद के चुनाव हुए थे तो 15 में से दस सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। सिर्फ पांच सीटें ही कांग्रेस के पास गईं। लेकिन अब अविश्वास प्रस्ताव में दस पार्षदों ने पवन गुप्ता के विरोध में मतदान किया है।
इसमें दोनों ही राजनैतिक पार्टियों के पार्षद शामिल हैं। यह पार्षद खुले मंच से पवन गुप्ता पर अकेले चलने के आरोप लगाते रहे हैं।एसडीएम एकता कापटा ने 30 दिन में नए अध्यक्ष के चयन के निर्देश जारी किए हैं। इस दौरान नगर परिषद कार्यालय में पुलिस का बंदोबस्त किया था। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने कार्यकर्ता बड़ी संख्या में नगर परिषद में मौजूद रहे।
अध्यक्ष हो गए हैं पदमुक्त
एसडीएम एकता कापटा ने बताया कि वे सार्वजनिक चुनाव करवाने के पक्ष में थी। लेकिन पूर्व अध्यक्ष के विरोध करने पर गुप्त मतदान का फैसला लिया गया। इसमें अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया है। अध्यक्ष को तत्काल पदमुक्त कर दिया है और अब 30 दिन में नए अध्यक्ष का चयन किया जाएगा। तब तक उपाध्यक्ष नप की कमान संभालेंगी।
सोलन नप में उलटफेर से कांग्रेस को बड़ी उम्मीदें
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सोलन नगर परिषद से भाजपा समर्थित अध्यक्ष की कुर्सी जाना कांग्रेस के लिए बड़ी उम्मीद की तरह है। कांग्रेस ने ऐसी नगर परिषद में सेंधमारी की है जहां पूरी तरह से भाजपा बहुमत में थी। 15 में से दस पार्षद भाजपा के साथ थे। लेकिन भारी उलटफेर में भाजपा समर्थित नप अध्यक्ष को कुर्सी गंवानी पड़ी। दस पार्षदों ने उनके विरोध में मतदान किया। इसमें साफ है कांग्रेस के पांच पार्षद मतदान में शामिल हुए तो पांच अन्य पार्षद भाजपा समर्थित थे।
नप में भाजपा के बीच की यह अंतर्कलह ताजा नहीं है। मई से विवाद चल रहा था। सारा मामला 28 मई को प्रशासन तक पहुंचा था और उसके बाद 16 दिन में नप अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाई थी। इस बीच भाजपा पार्टी हाईकमान की तरफ से मतभेद रोकने के लिए कोई पहल नहीं हुई।
हालांकि पूर्व अध्यक्ष कई बार खुले मंच से यह दावा जताते रहे कि पार्टी अविश्वास मत की नौबत नहीं आने देगी। सभी पार्षदों को एकमंच पर लाया जाएगा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। भाजपा ने पिछले विस चुनाव में सोलन सदर की सीट को भी गवां दिया था। यहां से कांग्रेस विधायक डॉ. धनी राम शांडिल ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार को करीब चार हजार मतों से करारी शिकस्त दी थी। इसके बाद पार्टी ने एकजुटता दिखाते हुए बिखरे कुनबे को समेटने की कोशिश शुरू की।
भाजपा पार्षदों ने की पार्टी से बगावत
लोस चुनाव में भाजपा का सोलन में प्रदर्शन शानदार रहा। इसके बाद पहले नप और फिर हाल ही में व्यापार मंडल सोलन के चुनाव जीतकर भाजपा ने अपना पुराना घर पक्का कर लिया था। लेकिन अब नप में हुए उलटफेर शुरू हो गया।
अध्यक्ष पद गंवाने वाले पवन गुप्ता को पूर्व मंत्री राजीव बिंदल का करीबी माना जाता है। अभी विस चुनाव होने वाले हैं और चुनाव के बाद सब अच्छा देखती आ रही भाजपा के लिए यह पहला बड़ा झटका है। अब देखना यह है कि नप के इस उलटफेर पर पार्टी हाईकमान की प्रतिक्रिया क्या रहती है।
नप के पूर्व अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा कि भाजपा पार्षदों ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर पार्टी से बगावत की है। इन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई पार्टी हाईकमान को करनी चाहिए। कुछ पार्षद निजी फायदे लेना चाहते थे जिन्हें उन्होंने रोक दिया और बदले में यह अविश्वास प्रस्ताव ले आए।
भाजपा जिलाध्यक्ष केएल ठाकुर ने कहा कि मंडल से इस बारे में रिपोर्ट मांगी जाएगी। मंडल की रिपोर्ट के आधार पर आगामी कार्रवाई होगी। अभी तक मंडल से उन्हें सोलन नप अध्यक्ष को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली है।
जिला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा में फूट का फायदा कांग्रेस को आगामी विस चुनाव में मिलेगा। लोग समझ चुके हैं कि भाजपा के लिए सत्ता चलाना आसान नहीं है। महज डेढ़ साल में नप का हाल सबके सामने है।