अब एवरेस्ट पर जाना बना फैशन: डोलमा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एवरेस्ट फतेह करने वाली महिला डिक्की डोलमा ने लेक्चर दिया। उन्होंने 1993 में एवरेस्ट फतेह करने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला बनने का गौरव हासिल किया था।
उन्होंने महिलाओं को महिला दिवस की शुभकामनाएं दीं और उनसे अपने अनुभव साझा किए। कहा कि पर्वतारोहण आपके भीतर के सभी भेद को मिटा देता है। पर्वत पर चढ़ने से अधिक चुनौतीपूर्ण वापस नीचे उतरना होता है।
असली धैर्य की परीक्षा उसी समय होती है, जब आपको आगे जाना हो और चुनौती देखकर पीछे हटकर नया रास्ता लेना पड़े। डिक्की डोलमा ने मीडिया से बातचीत में एवरेस्ट पर मानव गतिविधियां बढ़ने से फैलने वाले प्रदूषण पर भी चिंता जताई। कहा कि आज एवरेस्ट पर जाना एक फैशन हो गया है। जिसके पास पैसा है, वह इच्छा होने पर वहां चला जाता है।
पुस्तक का विमोचन किया
इस अवसर पर भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. मकरंद आर परांजपे ने डॉ. सौम्या शर्मा की ओर से लिखी पुस्तक अप्रोच टू प्रोटेक्शन एंड रिस्टटोरेशन, स्पेसिफिक फोकस ऑन कल्चरल हेरिटेज ऑफ शिमला का विमोचन किया।
संस्थान के निदेशक प्रोफेसर मकरंद आर परांजपे ने मुख्य वक्ता और अन्य का स्वागत किया। डॉ. मनीषा चौधरी अध्येता आईआईएएस ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रोफेसर अनीता सिंह अध्येता भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा।
लेखिका सौम्या शर्मा शिमला से संबद्ध रखती हैं। उनकी पुस्तक में चित्रों और नक्शों के साथ पर्यावरण, स्थान संरचना, विविध वास्तुकला और उसमें कलात्मक दृष्टि का महत्व और अंतिम प्रस्तावों को प्रस्तुत किया है।