सीमाओं से नशा तस्करी रोकने के लिए और प्रयास जरूरी: राज्यपाल
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नशीली दवाओं के सेवन और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस पर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने सीमावर्ती क्षेत्रों में गैर कानूनी तस्करी को रोकने के लिए अधिक सतर्कता और प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नशाखोरी से न केवल व्यक्ति या परिवार बल्कि पूरा समाज प्रभावित होता है। पुलिस प्रशासन को इस सामाजिक बुराई के उन्मूलन के लिए अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रसन्नता जताई कि पुलिस प्रशासन इस बुराई को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के नाम से जाना जाता है तथा इसकी संस्कृति, जीवन शैली, विचारधारा बहुत समृद्ध है लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि राज्य में नशाखोरी की समस्या एक विकराल रूप धारण कर चुकी है तथा यदि इसे शीघ्र न रोका गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक खराब हो सकती है। उन्होंने गैर सरकारी संस्थाओं को नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान में शामिल करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने अधिक पुनर्वास केंद्र स्थापित करने पर भी बल दिया। राज्यपाल ने कहा कि एक राष्ट्रीय सर्वे में यह बात सामने आई है कि 10 से 75 वर्ष की आयु के 14.6 प्रतिशत लोग शराब का प्रयोग करते हैं। जिनकी संख्या लगभग 16 करोड़ है। इस प्रकार हम यह समझ सकते हैं कि नशा कितनी गंभीर समस्या है।
अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस पर तीन जिलों के एसपी ने उठाई ये मांग
हिमाचल प्रदेश में नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए एक बार फिर कानून को सख्त करने की मांग उठी है। इस बार सूबे के तीन जिलों के पुलिस अधीक्षकों ने यह मांग राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के सामने की है। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर कांगड़ा, सिरमौर और कुल्लू के एसपी ने मांग की कि सरकार एनडीपीएस एक्ट के तहत स्टेट एडवाइजरी बोर्ड गठित कर सचिव स्तर के अधिकारी को अधिकृत कर दें ताकि इसके जरिये ऐसे अपराधियों को जो लगातार नशीले पदार्थ की बिक्री व तस्करी में शामिल हो रहे हैं, उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा जा सके। एसपी कांगड़ा विमुक्त रंजन ने कहा कि कांगड़ा में पंजाब और जम्मू में फल फूल रहे नशे के कारोबार का खासा प्रभाव पड़ा है।
पुलिस लगातार प्रयास कर रही है लेकिन अपराधी आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस को स्निफर डॉग से लेकर विभिन्न तरह की आधुनिक तकनीक, मैनपॉवर, उपकरण की जरूरत है जिसके बिना अंकुश लगाना संभव नहीं। एसपी सिरमौर अजय कृष्णा शर्मा ने बताया कि हरियाणा, यूपी और उत्तराखंड से सटे होने की वजह से नशीले पदार्थ की तस्करी का गढ़ बना हुआ है। कहा कि पंचायत से लेकर ग्रामीण स्तर तक लोगों को जागरूक कर नशा निवारण समितियों की मदद से नशे के सौदागरों पर सख्ती की जा रही है। कहा कि अवैध शराब के कारोबार में लिप्त रहने वाले कांगड़ा और सिरमौर के कुछ समुदाय अब चिट्टे के कारोबार में शामिल हो गए हैं। पूरे के पूरे गांव ही इस काम में शामिल है जिनपर कार्रवाई की जा रही है। साथ ही अवैध शराब की भट्ठियों पर भी अंकुश लगाकर स्थानीय लोगों की मदद से कार्रवाई की जा रही है।