बड़ा खुलासाः पुल निर्माण में हुआ था गोलमाल
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उद्घाटन के पांच महीने के भीतर ध्वस्त हो चुके साढ़े चार करोड़ रुपये के मूलिंग पुल मामले में नया सनसनीखेज खुलासा हुआ है। निर्माण के दौरान हिमखंड आने से स्टील स्ट्रक्चर के बीच का हिस्सा डैमेज हो गया था। उस दौरान जिला परिषद में बाकायदा एक प्रस्ताव पारित कर पीडब्ल्यूडी को भेजा गया। लेकिन पीडब्ल्यूडी के मेकेनिकल विंग ने स्ट्रक्चर के मुडे़ हुए हिस्सों को सीधा किए बगैर ही इस पर कंक्रीट बिछा दी।
हद तो तब हो गई जब इस टूटे ढांचे पर ही पुल का स्लैब बिछा दिया जिसमें इस्तेमाल की गई रेत-बजरी भी जांच में घटिया निकली। फिर भी न तो ठेकेदार को किसी ने पूछा और न ही पुल का निर्माण रुका। मतलब साफ है कि पुल निर्माण में घोर लापरवाही ही नहीं बल्कि बड़ा घपला हुआ।
शिकायत के बावजूद नहीं की कोई कार्रवाई
सूत्र बताते हैं कि स्टील स्ट्रक्चर के स्ट्रेंथ पर संदेह की वजह से लोनिवि ने पुल पर कंक्रीट बिछाने से पहले मेकेनिकल विंग से लिखित में एनओसी लिया है। रिटायर डीएसपी एवं जिप सदस्य प्रेम चंद कटोच ने बताया कि पुल पर सीमेंट कंक्रीट बिछाने से पहले ही ब्रिज का स्टील स्ट्रक्चर बीच से मुड़ गया था।
जिला परिषद ने प्रस्ताव पारित कर इसे विभाग को भेजा, लेकिन जिला परिषद के प्रस्ताव को नजरअंदाज कर पुल तैयार कर दिया गया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी के ईएनसी को पत्र भी लिखा। कहा कि मेकेनिकल विंग ने पुल में उसी लोहे का इस्तेमाल किया, जो हिमखंड के कारण काफी मुड़ चुका था। उन्होंने इस डैमेज हुए लोहे का दोबारा इस्तेमाल नहीं करने की अपील भी की थी।
विधानसभा में खूब गूंजा अमर उजाला
उधर, विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन सदन में ‘अमर उजाला’ की खबरें खूब गूंजीं। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने उद्घाटन के पांच माह में ही लाहौल के मूलिंग पुल के गिरने का मामला जोरशोर से उठाया। पिछले तीन दिनों से अमर उजाला में प्रकाशित हो रहीं मूलिंग पुल की खबरों को उन्होंने सदन में पढ़कर सुनाया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पांच माह में पुल का गिराना भ्रष्टाचार की हद है। तीन दिन बाद भी सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। अमर उजाला ने सबसे पहले इस मामले को उठाया है।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जिस पुल का उद्घाटन अक्तूबर 2014 में किया गया, वो मार्च 2015 में गिर जाता है। तीन दिन से अखबार में लगातार खबरें प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। भ्रष्टाचार का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है।
जिस विधायक ने पुल का उद्घाटन किया, उन्होंने ही सदन में पुल गिरने पर सवाल लगा दिया है। आज विधायक सदन में नजर नहीं आ रहे। इसके अतिरिक्त भाजपा कार्यालय के बाहर खूनी संघर्ष पर अमर उजाला में ‘आसमान से बरसे फाहे, पहाड़ी से पत्थर, सड़क पर लात-घूंसे, लाठियां’ शीर्षक से छपी खबर को हवाला देते हुए कहा कि कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए।
चीफ इंजीनियर करेंगे जांच
लोनिवि के ईएनसी नरेश शर्मा ने कहा कि मंडी जोन के चीफ इंजीनियर को जांच के लिए लाहौल भेजा जा रहा है। उन्होेंने कहा कि स्टील स्ट्रक्चर में मेकेनिकल विंग की कोताही पाई गई तो जरूर कार्रवाई होगी।
पीडब्ल्यूडी के अधिषाशी अभियंता जीएस नेगी ने कहा कि पुल का स्टील स्ट्रक्चर टूटने से इस पर बिछी कंक्रीट का गिरना लाजमी है। वहीं मेकेनिकल विंग के अधिषाशी अभियंता अजय शर्मा का कहना है कि इलाके में रिकॉर्ड बर्फ गिरी है। पुल पर बर्फ का वजन अधिक होने के कारण शायद हादसा पेश आया है।
घटिया पाई गई थी सामग्री
पुल के निर्माण कार्य के दौरान पीडब्ल्यूडी मंडी जोन स्थित क्वालिटी विंग टीम ने मौके पर इस्तेमाल हो रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की थी। इसमें पुल निर्माण पर इस्तेमाल रेत हल्का और बारीक पाया गया। साथ ही कंकरीट की मात्रा भी कम थी।
अफसर संदेह के घेरे में
पीडब्ल्यूडी के मेकेनिकल विंग पर गाज गिर सकती है। विभाग की प्रारंभिक तफतीश में ऐसे संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि जांच पूरी होने तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। इधर, पीडब्ल्यूडी चिनाब डिवीजन ने विधानसभा से आए सवाल के जवाब में लिखा है कि मूलिंग ब्रिज के दोनों एवटमेंट सुरक्षित हैं। लिहाजा, पुल निर्माण के दौरान सिविल वर्क को अंजाम देते समय किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई है।