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शहर में बंदर पकड़ने का काम बंद, लोगों पर आए दिन हो रहे हमले
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Monkey attack on people in shimla
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प्रजनन सीजन के चलते अब बरसात में ही शुरू हो पाएगा बंदर पकड़ने का अभियान
रिज और मालरोड पर हर रोज छीन रहे सामान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बंदरों ने फिर से उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। शहर में आए दिन लोगों पर बंदरों के हमले हो रहे हैं। रिज और मालरोड पर वीरवार को कई लोगों पर बंदर झपटे तथा सामान छीनकर ले गए।
दूसरी ओर वन्यजीव विभाग ने शहर में बंदरों को पकड़ने का काम बंद कर दिया है। विभाग का कहना है कि अप्रैल से जून तक बंदरों के प्रजनन का समय होता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान बंदर पकड़ने पर रोक होती है। हालांकि, यदि कोई बंदर बार-बार हमले कर रहा हो तो उसे पकड़ने के लिए टीम भेजी जाती है। बंदरों को पकड़ने और उनकी नसबंदी का काम अब बरसात के मौसम में ही शुरू हो पाएगा।
शहर के कोर एरिया समेत बाकी इलाकों में बंदर हमलावर हो रहे हैं। बाजारों और अस्पतालों के नजदीक बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग की मानें तो अस्पतालों और बाजारों के समीप बाजारों को खाने-पीने की चीजें आसानी से मिल रही हैं। इसलिए इन इलाकों में बंदरों की संख्या भी बढ़ रही है। लोग यदि बंदरों को खाना देना बंद कर दें तो इससे बंदरों का दूसरे इलाकों में पलायन हो सकता है। डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने पर बंदर पकड़े जा रहे हैं।
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रिज और मालरोड पर हर रोज छीन रहे सामान
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बंदरों ने फिर से उत्पात मचाना शुरू कर दिया है। शहर में आए दिन लोगों पर बंदरों के हमले हो रहे हैं। रिज और मालरोड पर वीरवार को कई लोगों पर बंदर झपटे तथा सामान छीनकर ले गए।
दूसरी ओर वन्यजीव विभाग ने शहर में बंदरों को पकड़ने का काम बंद कर दिया है। विभाग का कहना है कि अप्रैल से जून तक बंदरों के प्रजनन का समय होता है। ऐसे में इस अवधि के दौरान बंदर पकड़ने पर रोक होती है। हालांकि, यदि कोई बंदर बार-बार हमले कर रहा हो तो उसे पकड़ने के लिए टीम भेजी जाती है। बंदरों को पकड़ने और उनकी नसबंदी का काम अब बरसात के मौसम में ही शुरू हो पाएगा।
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शहर के कोर एरिया समेत बाकी इलाकों में बंदर हमलावर हो रहे हैं। बाजारों और अस्पतालों के नजदीक बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विभाग की मानें तो अस्पतालों और बाजारों के समीप बाजारों को खाने-पीने की चीजें आसानी से मिल रही हैं। इसलिए इन इलाकों में बंदरों की संख्या भी बढ़ रही है। लोग यदि बंदरों को खाना देना बंद कर दें तो इससे बंदरों का दूसरे इलाकों में पलायन हो सकता है। डीएफओ कृष्ण कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने पर बंदर पकड़े जा रहे हैं।
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