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Shimla News: चमियाना अस्पताल में पहुंची आधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन
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मशीन पर 23 करोड़ रुपये किए गए हैं खर्च, इंस्टाल का कार्य शुरू, लोगों को आईजीएमसी जाने की नहीं रहेगी जरूरत
मरीजों को अब नहीं काटने पड़ेंगे आईजीएमसी के चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों को अब एमआरआई करवाने के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल में आधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पहुंच गई है। इसे इंस्टाल करने का कार्य किया जा रहा है।
मरीजों को फायदा देने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 23 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। अभी तक मरीजों को एमआरआई करवाने के लिए आईजीएमसी जाना पड़ता है। इसमें मशीन की खरीद से लेकर इंस्टाल करवाने का खर्च जोड़ा है। जैसे ही मशीन अस्पताल में लग जाएगी इसके बाद मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वार्ड समेत आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और निजी लैब में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। इससे मरीजों की जेब का बोझ भी कम हो जाएगा। अस्पताल में ही एमआरआई सुविधा मिलने के बाद समय भी बर्बाद नहीं होगा और उपचार में देरी भी नहीं होगी।
गौरतलब है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के शुरू होने के बाद एमआरआई करवाने के लिए मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चमियाना अस्पताल में हर रोज 15 से 20 मरीजों के एमआरआई लिखे जाते हैं। इनमें न्यूरो सर्जरी के मरीजों का सबसे अधिक आंकड़ा है। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में आने वाले मरीजों के लिए भी एमआरआई टेस्ट करवाने की जरूरत होती है। इन सभी मरीजों को वर्तमान में आईजीएमसी भेजा जाता है। जहां पर मरीजों को लंबी वेेटिंग का सामना करना पड़ता है। आधुनिक टेस्ट सुविधा के शुरू होने से एमआरआई करवाने के लिए आईजीएमसी लंबी वेटिंग होने के कारण इंतजार नहीं करना पड़ा करेगा।
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मशीन लगने से यह होगा फायदा
मशीन की उच्च शक्ति के कारण बहुत छोटे ट्यूमर, मस्तिष्क विकारों (जैसे एपिलेप्सी) और कोमल उतकों की चोटों को अधिक सटीकता से पहचाना जा सकता है। कम समय में हाई-डेफिनिशन इमेज बनाती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक लेटने की आवश्यकता नहीं होती। तेज प्रक्रिया के कारण क्लोस्ट्रोफोबिया (बंद जगह का डर) वाले मरीजों के लिए बेहतर है। न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, और ऑन्कोलॉजी में जटिल मामलों के लिए यह थ्री टी तकनीक एक वरदान है।
कोट
अस्पताल में थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पहुंच गई है। मशीन को इंस्टाल करने का कार्य शुरू कर दिया है। मरीजों को जल्द सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मशीन से बीमारी की बारीकियों का भी आसानी से पता चल सकेगा।
-डाॅ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना
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मरीजों को अब नहीं काटने पड़ेंगे आईजीएमसी के चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में मरीजों को अब एमआरआई करवाने के लिए भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल में आधुनिक थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पहुंच गई है। इसे इंस्टाल करने का कार्य किया जा रहा है।
मरीजों को फायदा देने के लिए अस्पताल प्रबंधन ने 23 करोड़ रुपये की राशि खर्च की है। अभी तक मरीजों को एमआरआई करवाने के लिए आईजीएमसी जाना पड़ता है। इसमें मशीन की खरीद से लेकर इंस्टाल करवाने का खर्च जोड़ा है। जैसे ही मशीन अस्पताल में लग जाएगी इसके बाद मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। वार्ड समेत आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और निजी लैब में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। इससे मरीजों की जेब का बोझ भी कम हो जाएगा। अस्पताल में ही एमआरआई सुविधा मिलने के बाद समय भी बर्बाद नहीं होगा और उपचार में देरी भी नहीं होगी।
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गौरतलब है कि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के शुरू होने के बाद एमआरआई करवाने के लिए मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चमियाना अस्पताल में हर रोज 15 से 20 मरीजों के एमआरआई लिखे जाते हैं। इनमें न्यूरो सर्जरी के मरीजों का सबसे अधिक आंकड़ा है। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग में आने वाले मरीजों के लिए भी एमआरआई टेस्ट करवाने की जरूरत होती है। इन सभी मरीजों को वर्तमान में आईजीएमसी भेजा जाता है। जहां पर मरीजों को लंबी वेेटिंग का सामना करना पड़ता है। आधुनिक टेस्ट सुविधा के शुरू होने से एमआरआई करवाने के लिए आईजीएमसी लंबी वेटिंग होने के कारण इंतजार नहीं करना पड़ा करेगा।
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मशीन लगने से यह होगा फायदा
मशीन की उच्च शक्ति के कारण बहुत छोटे ट्यूमर, मस्तिष्क विकारों (जैसे एपिलेप्सी) और कोमल उतकों की चोटों को अधिक सटीकता से पहचाना जा सकता है। कम समय में हाई-डेफिनिशन इमेज बनाती है, जिससे मरीजों को लंबे समय तक लेटने की आवश्यकता नहीं होती। तेज प्रक्रिया के कारण क्लोस्ट्रोफोबिया (बंद जगह का डर) वाले मरीजों के लिए बेहतर है। न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, और ऑन्कोलॉजी में जटिल मामलों के लिए यह थ्री टी तकनीक एक वरदान है।
कोट
अस्पताल में थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन पहुंच गई है। मशीन को इंस्टाल करने का कार्य शुरू कर दिया है। मरीजों को जल्द सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। मशीन से बीमारी की बारीकियों का भी आसानी से पता चल सकेगा।
-डाॅ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना