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मोबाइल खराब, वसूली कीमत लौटाने के आदेश
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उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला
साथ में दो हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वारंटी अवधि के दौरान बार-बार खराब हो रहे मोबाइल फोन को न बदलने पर संबंधित कंपनियों को उपभोक्ता से वसूली गई फोन की कीमत राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट, मोबाइल कंपनी एमआई/रेडमी और शिमला के मोबाइल सर्विस सेंटर हनु कंप्यूटर्स के खिलाफ सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य जगदेव सिंह रिटका ने यह फैसला सुनाया है। राज्य बिजली बोर्ड में तैनात संजीव कुमार ने फ्लिपकार्ट से 9,999 रुपये में एमआई/रेडमी नोट 4 फोन खरीदा था। फोन की एक साल की वारंटी थी। फोन खरीदने पर आश्वस्त किया था कि अगर फोन में कोई खराबी आई तो शिमला में अधिकृत सर्विस स्टेशन पर बिना किसी शुल्क के फोन ठीक किया जाएगा। कुछ समय बाद फोन में खराबी आ गई और यह स्विच ऑफ होने लगा।
फोन की बैटरी भी चार्जिंग के तुरंत बाद डिस्चार्ज होने लगी। सर्विस सेंटर में दिखाने पर फोन को ठीक कर ग्राहक को सौंप दिया। चार महीने बाद फोन में दोबारा वही समस्या शुरू हो गई। फोन सर्विस सेंटर में दिखाया तो संजीव को समस्या को लेकर कंपनी से संपर्क करने को कहा गया। ग्राहक ने कंपनी से संपर्क किया और वारंटी अवधि के दौरान खराबी आने के चलते इसे बदलने को लेकर मेल के माध्यम से आग्रह किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्राहक ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामले की शिकायत की। आयोग ने पाया कि मोबाइल सेट के संचालन में शुरू से ही समस्या रही है। फोन में निर्माण के समय से ही खराबी थी। यह सही है कि फ्लिपकार्ट विभिन्न निर्माताओं और विक्रेताओं के उत्पादों को बेचने के लिए सिर्फ एक प्लेटफार्म है, लेकिन नवीनतम कानूनों के तहत कंपनी अपने दायित्वों से नहीं बच सकती। दोष पूर्ण उत्पाद वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं किए जा सकते। इसलिए कंपनी शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी है। आयोग ने सभी प्रतिवादियों को शिकायतकर्ता को मोबाइल फोन की लागत 9999 रुपये लौटाने और 2000 रुपये अतिरिक्त राशि के भुगतान के निर्देश दिए हैं।
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साथ में दो हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने वारंटी अवधि के दौरान बार-बार खराब हो रहे मोबाइल फोन को न बदलने पर संबंधित कंपनियों को उपभोक्ता से वसूली गई फोन की कीमत राशि लौटाने के निर्देश दिए हैं।
यह फैसला ई-कामर्स कंपनी फ्लिपकार्ट, मोबाइल कंपनी एमआई/रेडमी और शिमला के मोबाइल सर्विस सेंटर हनु कंप्यूटर्स के खिलाफ सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य जगदेव सिंह रिटका ने यह फैसला सुनाया है। राज्य बिजली बोर्ड में तैनात संजीव कुमार ने फ्लिपकार्ट से 9,999 रुपये में एमआई/रेडमी नोट 4 फोन खरीदा था। फोन की एक साल की वारंटी थी। फोन खरीदने पर आश्वस्त किया था कि अगर फोन में कोई खराबी आई तो शिमला में अधिकृत सर्विस स्टेशन पर बिना किसी शुल्क के फोन ठीक किया जाएगा। कुछ समय बाद फोन में खराबी आ गई और यह स्विच ऑफ होने लगा।
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फोन की बैटरी भी चार्जिंग के तुरंत बाद डिस्चार्ज होने लगी। सर्विस सेंटर में दिखाने पर फोन को ठीक कर ग्राहक को सौंप दिया। चार महीने बाद फोन में दोबारा वही समस्या शुरू हो गई। फोन सर्विस सेंटर में दिखाया तो संजीव को समस्या को लेकर कंपनी से संपर्क करने को कहा गया। ग्राहक ने कंपनी से संपर्क किया और वारंटी अवधि के दौरान खराबी आने के चलते इसे बदलने को लेकर मेल के माध्यम से आग्रह किया लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्राहक ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में मामले की शिकायत की। आयोग ने पाया कि मोबाइल सेट के संचालन में शुरू से ही समस्या रही है। फोन में निर्माण के समय से ही खराबी थी। यह सही है कि फ्लिपकार्ट विभिन्न निर्माताओं और विक्रेताओं के उत्पादों को बेचने के लिए सिर्फ एक प्लेटफार्म है, लेकिन नवीनतम कानूनों के तहत कंपनी अपने दायित्वों से नहीं बच सकती। दोष पूर्ण उत्पाद वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं किए जा सकते। इसलिए कंपनी शिकायतकर्ता को क्षतिपूर्ति देने के लिए उत्तरदायी है। आयोग ने सभी प्रतिवादियों को शिकायतकर्ता को मोबाइल फोन की लागत 9999 रुपये लौटाने और 2000 रुपये अतिरिक्त राशि के भुगतान के निर्देश दिए हैं।
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