धूमल-अनुराग के खिलाफ केस निरस्त करने का आदेश भूलवश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुप्रीम कोर्ट ने धर्मशाला में क्रिकेट स्टेडियम बनाने के लिए जमीन देने के मामले में कथित अनियमितता पर एफआईआर रद्द करने के आदेश पर अपनी गलती मान ली।
शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने भूलवश भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल सहित अन्य के खिलाफ दर्ज मुकदमे को निरस्त करने का आदेश दिया था। इस मामले पर 29 नवंबर को सुनवाई होगी।
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की ओर से पेश वकील ने सोमवार को न्यायमूर्ति ए के सीकरी और न्यायमूर्ति एस ए नजीर की पीठ से कहा कि 2 नवंबर के आदेश को वापस लिया जाना चाहिए। मालूम हो कि 2 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर व अन्य के खिलाफ दो एफआईआर को रद्द कर दिया था।
यहां जानिए पूरा मामला
पहली, स्टेडियम के निर्माण को लीज पर देने में अनियमितता बरतने और दूसरी एफआईआर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से संबंधित थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भूलवश दूसरी एफआईआर को भी रद्द कर दिया था।
अनुराग ठाकुर की ओर से पेश वकील पीएस पटवालिया ने कहा कि आदेश को वापस लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि मुख्य एफआईआर को पहले ही निरस्त किया जा चुका है।
दूसरी एफआईआर शिक्षा विभाग के स्टाफ क्वार्टर को गैरकानूनी तरीके से तोड़ने से संबंधित है, लेकिन हकीकत यह है कि शिक्षा सचिव ने एनओसी दी हुई थी और शिक्षा मंत्री ने उस पर मुहर भी लगा दी थी।