हिमाचल में कलरफुल वर्दी पर लेटलतीफी ने लगाया दाग
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर शुरू की गई अटल स्कूल वर्दी योजना के तहत बांटी जाने वाली कलरफुल वर्दी पर अफसरशाही की लेटलतीफी ने दाग लगा दिया है। साल 2018 में नई वर्दी पहनने से लाखों विद्यार्थी महरूम रह गए हैं।
18 मई से लेकर 11 दिसंबर तक स्मार्ट वर्दी सरकारी फाइलों में सिमट कर रह गई। अब नई खरीद प्रक्रिया शुरू होने में लगने वाले समय के चलते विद्यार्थियों को स्मार्ट वर्दी के लिए फरवरी माह तक का इंतजार करना पड़ेगा।
18 मई को वर्दी खरीद के लिए खाद्य आपूर्ति निगम ने ई निविदाएं आमंत्रित की थी। इसमें छह कंपनियां शामिल हुईं। निविदा में सभी प्रतिभागी पार्टियाें द्वारा जमा करवाए गए सैंपलों की जांच मान्यता प्राप्त लैब से करवाई गई।
सभी सैंपल निर्धारित मानकों पर सही पाए गए। 16 जुलाई को वित्तीय निविदा खोली गई। वित्तीय निविदा में मैसर्ज मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड की दरें सबसे कम पाई गई।
मामला ठंडे बस्ते में पड़ रहा
इम्पावर्ड कमेटी के दिशा निर्देशों के अनुसार निगम द्वारा एल वन पार्टी के साथ नेगोशिएशन की गई। नेगोशिएशन के बाद जो दरें प्राप्त हुई, उन्हें पहली अगस्त को शिक्षा सचिव को स्वीकृति के लिए भेजा गया। शिक्षा सचिव ने मामले की फाइल 14 अगस्त को शिक्षा मंत्री को भेजी।
14 अगस्त के बाद से मामला ठंडे बस्ते में पड़ रहा। बीते माह हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री ने वर्दी खरीद में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताते हुए अफसरों को जल्द फैसला लेने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री की फटकार के बाद भी अफसरशाही नहीं जागी।
मंगलवार को दोबारा से मामला मंत्रिमंडल की बैठक में लाया गया। जहां सरकार ने पुरानी प्रक्रिया को रद्द करते हुए नए सिरे से खरीद को मंजूरी दी है। मंत्रिमंडल ने नए सिरे से साल 2018-19, 2019-20 और 2020-21 के लिए खरीद करने के आदेश दिए हैं।