किसान आंदोलन: हिमाचल में दूध और सब्जी का संकट
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देश में किसान आंदोलन से हिमाचल में सब्जी, फलों, दूध, दही का संकट खड़ा हो गया है। सब्जी और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं। लोगों को या तो ये खाद्य पदार्थ नहीं मिल रहे हैं, जहां मिल रहे हैं वहां इनकी कीमतें कई गुना बढ़ा दी गई हैं।
आंदोलन की आड़ में कई सब्जी और फल विक्रेता उपभोक्ताओं से मनमानी करने पर उतर आए हैं। उत्तर और मध्य भारत में किसानों के इस आंदोलन के बीच पड़ोसी राज्य पंजाब से सब्जियां और फल हिमाचल नहीं आ पा रहे हैं।
न ही हिमाचल के लिए दूध की पर्याप्त आपूर्ति हो पा रही है। इसका असर प्रदेश के लगभग सभी जिलों पर पड़ा है। पंजाब से आपूर्ति बाधित होने से उपलब्ध सब्जियों के दामों में भारी उछाल आया है।
आंदोलन से इन सब्जियों के दाम बढ़े
दो दिन में ही गोभी, बैंगन, घीया, शिमला मिर्च, फ्रासबीन, भिंडी और अन्य सब्जियों के दाम प्रति किलो 10 से 30 रुपये तक बढ़े हैं। भिंडी 50 से 60 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है। शिमला मिर्च के दाम 40 प्रति किलो हो गए हैं।
अन्य सब्जियों का भी यही हाल है। स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली सब्जियां मार्केट मेें मांग पूरा करने में कामयाब नहीं हो पा रही हैं। दूध भी लोगों को वही मिल पा रहा है, जिसकी पैदावार स्थानीय स्तर पर होती है।
हिमाचल में फल सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ आंदोलन में कूदा
फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने कहा है कि किसान एकता मंच के सौजन्य उत्तरी और मध्य भारत में आंदोलन हो रहा है। हिमाचल में फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ इसमें सहयोग कर रहा है।
हमारा नारा किसान छुट्टी पर है। हमारी मुख्य तीन मांगें हैं। 18 हजार रुपये न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करें। एकमुश्त संपूर्ण कर्ज माफी की जाए। हिमाचल की राज्य स्तरीय मांगों में सब्जी और दूध का न्यूनतम मूल्य तय हो, जो लागत का डेढ़ गुना हो।
सेब को विशेष उत्पाद घोषित करें। किसान न तो शहर से कुछ खरीदेगा और न बेचेगा। दूध, सब्जियां हो सके तो अपने गांव में ही बेचेगा ताकि शहर वाले गांव से खरीदें। ये आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा। कोई तोड़फोड़ और नारेबाजी नहीं होगी।