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स्पीति घाटी में एक और घोटाला, मिड-डे मील का डकार गए 500 क्विंटल चावल

Thu, 11 Oct 2018 12:36 PM IST
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति)
अशोक राणा, अमर उजाला, केलांग (लाहौल स्पीति) Updated Thu, 11 Oct 2018 12:36 PM IST
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Mid-day meal 500 quintal rice scam in Lahaul Spiti Himachal Pradesh

ढाई सौ करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले के बाद स्पीति घाटी में मिड-डे मील की सप्लाई का घोटाला उजागर हुआ है। शिक्षा विभाग के निरीक्षण विंग की रिपोर्ट के मुताबिक नौनिहालों को मिड-डे मील के तहत जारी करीब 500 क्विंटल चावल घोटालेबाज डकार गए हैं। स्पीति घाटी के सैकड़ों स्कूली बच्चों को लगभग दो साल तक मिड-डे मील का चावल का कोटा नहीं मिला।

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शिक्षा विभाग के निरीक्षण विंग की जांच में लाखों रुपये के इस कथित घोटाले का खुलासा हुआ है। इससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच रिपोर्ट तैयार कर इसकी फाइल संयुक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा को आगामी कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दी है। विंग की मानें तो यह चावल ए ग्रेड का होता है और बाजार में इसकी कीमत 60 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस हिसाब से इस खेप की कीमत 30 लाख रुपये बैठती है।

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Mid-day meal 500 quintal rice scam in Lahaul Spiti Himachal Pradesh

मिड-डे मील के तहत सिविल सप्लाई खाद्य आपूर्ति निगम से चावल की आवंटित होने वाली खेप उठाकर स्कूलों को सप्लाई होती है। चीन सीमा से सटे जनजातीय क्षेत्र में अप्रैल 2014 से सितंबर 2016 तक मिड-डे मील के तहत स्कूलों को चावल का कोटा नहीं मिला है। यह कोटा कहां गया, किसने गायब किया, यह जांच का विषय है।

नौनिहालों को चावल का कोटा उपलब्ध न होने के कारण स्पीति के तमाम स्कूल प्रभारियों, सीएचटी और प्रधानाचार्यों ने प्रारंभिक निदेशक शिक्षा को पत्र भेजकर मिड-डे मील योजना बंद करने की सिफारिश की। गौर रहे कि मिड डे मील की बेहतर मॉनीटरिंग के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग को राष्ट्रीय अवार्ड मिल चुका है।

ऐसे में घोटाला लोगों के गले नहीं उतर रहा। एसडीएम एवं उपनिदेशक शिक्षा काजा जीवन नेगी ने कहा कि निरीक्षण विंग से ऐसी रिपोर्ट मिली है। घाटी के स्कूलों और सिविल सप्लाई से भी रिपोर्ट मांगी गई है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक रोहित जंवाल ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। रिपोर्ट मिलती है, तो विभाग मामले की तहकीकात कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

अप्रैल 2014 से सितंबर 2016 तक करीब 500 क्विंटल चावल का कोटा नहीं मिला है। रिपोर्ट तैयार कर विंग के संयुक्त निदेशक और स्पीति के शिक्षा उपनिदेशक को प्रेषित कर दी है। - सुरेश विद्यार्थी, कार्यकारी उपनिदेशक, निरीक्षण विंग

मामला गंभीर है। मिड-डे मील के तहत चावल का कोटा नहीं मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार मामले की गंभीरता को देखते इसकी उच्चस्तरीय जांच करवाएगी।  - डॉ. रामलाल मारकंडा, कृषि एवं जनजातीय विकास मंत्री

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