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लालबत्ती नहीं मिली तो ये क्या कर डाला!

Sun, 14 Dec 2014 12:06 AM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला Updated Sun, 14 Dec 2014 12:06 AM IST
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Member of the Legislative Assembly of Himachal denied orange beacon.

लालबत्ती की सियासी लार टपका रहे विधायकों ने संतरी बत्ती को नकार दिया है। विधायकों ने अपनी गाड़ियों पर सरकार से मिली संतरी बत्ती लगाने के बजाय एमएलए लिखे स्टीकर लगाकर काम चलाना शुरू कर दिया है। धर्मशाला में सात दिन चले शीतकालीन सत्र में अमूमन विधायकों ने अपनी गाड़ियों पर संतरी बत्ती की जगह एमएलए लिखे स्टीकर लगाकर रखे थे। जहां मौका मिल रहा है, विधायक वहीं लाल रंग का मोह बयां कर रहे हैं।

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धर्मशाला में शीत सत्र के दौरान विधायकों ने लालबत्ती की मांग का कोई मौका नहीं छोड़ा। चाहे वह सकोह बटालियन में पुलिस का कार्यक्रम हो या विधानसभा परिसर। हर जगह कोशिश की गई लालबत्ती की स्वीकृति पाने की। शीत सत्र में कैबिनेट की बैठक में भी लाल बत्ती को लेकर विधायकों का विरोध काम नहीं आया।
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वहीं, मुख्यमंत्री को डिनर डिप्लोमेसी भी फेल हो गई। विधायक तर्क देते रहे कि जिन अफसरों को वह आदेश देते हैं, उन्हें लाल बत्ती मिल गई तो फिर उन्हें क्यों महरूम रखा गया। लेकिन, इस तर्क का सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा। हालांकि, विधायक कहते हैं कि वे अपनी मांग मनवाकर ही रहेंगे।
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भारती ने फेसबुक पर विधायकों को संतरी बताया

सीपीएस एवं जवाली से विधायक नीरज भारती ने तो लाल बत्ती का दर्द सोशल मीडिया पर भी बयां कर दिया। फेसबुक पर उन्होंने मंत्रियों को लाल बत्ती, संतरियों को संतरी बत्ती... स्टेट्स डाल दिया है। इस कमेंट को 218 लोगों ने लाइक किया है जबकि ढेरों कमेंट आए हैं।


लालबत्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार

फर्स्ट टाइमर एमएलए एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय रतन ने कहा कि कैबिनेट बैठक के निर्णय में विधायकों को अलग पहचान के रूप में एंबर लाइट दी गई है। कानूनी पेचीदगियों के चलते प्रदेश सरकार विधायकों को लालबत्ती नहीं दे पाई। लालबत्ती के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इसका रिव्यू भी चल रहा है।

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