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स्कूलों में आठवीं तक हिंदी में दी जाए शिक्षा, शिमला में हुआ मंथन

Fri, 19 Jul 2019 05:51 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 19 Jul 2019 05:51 PM IST
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meeting regarding taking suggestions for National Education Policy held in shimla
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

प्रदेश के स्कूलों में आठवीं तक मातृ भाषा हिंदी में पढ़ाई कराने पर जोर देने की बात हो रही है। शुक्रवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए सुझाव लेने के लिए राजधानी शिमला में हुई बैठक में अधिकांश वक्ताओं ने मातृ भाषा हिंदी में प्रारंभिक शिक्षा देने की बात कही।

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शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज की अध्यक्षता में हुई बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग के गठन को गुणात्मक शिक्षा के लिए जरूरी बताया गया। स्कूल-कॉलेजों में रोजगारोन्मुखी और तकनीक आधारित शिक्षा देने पर भी बल दिया गया।
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शनिवार को भी यह बैठक जारी रहेगी। बैठक में दिए गए सुझावों की रिपोर्ट 25 जुलाई तक सरकार को सौंपी जाएगी। प्रदेश सरकार 31 जुलाई तक केंद्र सरकार को अपने सुझाव भेजेगी।
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हिमाचल प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हिंदी भाषा की अनदेखी देश के हित में नहीं है। अंग्रेजी तो विदेशी भाषा है। ऐसे में हमें अपनी मातृ भाषा का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि हिमाचल सरकार ने हिंदी को राज्य भाषा घोषित किया है। संस्कृत को प्रदेश की दूसरी भाषा बनाया गया है। शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गठित होने वाले राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग बनने से विभिन्न संस्थानों की मनमानी खत्म होगी।

नवीं से जमा दो कक्षा तक सेमेस्टर को ना

meeting regarding taking suggestions for National Education Policy held in shimla

एक आयोग के तहत गुणात्मक शिक्षा को बल मिलेगा। यूजीसी के सदस्य और हिमाचल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. नागेश ठाकुर ने भी प्राइमरी शिक्षा मातृ भाषा में देने का सुझाव रखा।

उन्होंने कहा कि इससे देश के प्रति भावना पैदा होगी। क्लस्टर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सीएल चंदन ने प्री प्राइमरी शिक्षा पर जोर देते हुए हिंदी भाषा में आठवीं तक की पढ़ाई करवाने की बात कही। केंद्र सरकार ने नवीं से जमा दो तक भी सेमेस्टर सिस्टम शुरू करने का प्रस्ताव किया है।

हिमाचल सरकार इसके हक में नहीं है। स्कूलों में बच्चों की संख्या कम होने और सूबे की भौगोलिक स्थिति के चलते प्रदेश सरकार इस प्रस्ताव के समर्थन में नहीं है। केंद्र सरकार से हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के स्कूलों में सेमेस्टर सिस्टम शुरू नहीं करने की मांग की जाएगी। 

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