नई दवाइयों के टेंडर लटके, मौजूदा स्टॉक 20 दिन बाद हो रहा एक्सपायर
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सूबे में दवाइयों की टेंडर प्रक्रिया बीते तीन सालों से अधर में लटकी है। अस्पतालों में सरकार 330 प्रकार की दवाइयां और गर्भवती महिलाओं के प्रसव पर बेबी किट निशुल्क उपलब्ध करवाने के दावे कर रही है, लेकिन प्रदेश के अस्पतालों में जो दवाइयों का मौजूदा स्टॉक है, वह बीस दिन बाद 31 जनवरी को एक्सपायर हो रहा है। तीन सप्ताह के बाद एक्सपायर हो रही दवाइयों को अब अस्पतालों में धड़धड़ा बांटा जा रहा है।
स्टॉक खत्म करने के लिए तो कई मरीजों को आवश्यकता से अधिक दवाइयां दी जा रही हैं। ऐसा ही एक मामला हमीरपुर में सामने आया है। यहां एक मरीज ने उपमंडल बड़सर के एक सरकारी अस्पताल में दवाई ली। उस दवाई पर निर्माण की तारीख फरवरी 2017 और एक्सपायरी तारीख जनवरी 2019 अंकित है। इस तरह से 31 जनवरी के बाद प्रदेश के अस्पतालों में पड़ी लाखों रुपये की कीमत की दवाइयां खराब हो जाएंगी।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह दवाइयां पहले क्यों नहीं वितरित की गईं, जबकि डॉक्टर अमूमन मरीजों को अस्पताल के बाहर से ब्रांडेड और महंगी दवाएं लिखकर देते रहे हैं। दि उपभोक्ता संगठन के चेयरमैन एडवोकेट सुशील शर्मा ने कहा कि अस्पतालों में दवाइयों के उचित वितरण के लिए सरकार को उचित कदम उठाने चाहिए।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी हमीरपुर डॉ. सावित्री कटवाल ने कहा कि विभाग ने सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों को सरकारी अस्पतालों में एक्सपायरी तारीख से पहले मरीजों को दवाइयों के वितरण के निर्देश दिए हैं। अगर जिले में कहीं इस तरह का मामला सामने आता है तो उचित कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।