{"_id":"5d34f84a4652085573ab1d7d9c2f2e5d","slug":"medical-thoroscopy-at-igmc-shimla-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिमला में ही हो सकेगी चेस्ट बीमारियों की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिमला में ही हो सकेगी चेस्ट बीमारियों की जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 06 Feb 2016 10:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मेडिकल थोरोस्कोपी प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस तकनीक से छाती में होने वाली बीमारियों का समय रहते पता चल पाएगा। आईजीएमसी अस्पताल में इस तकनीक का पहली बार प्रयोग किया गया है।
विज्ञापन
आईजीएमसी अस्पताल में पल्मनरी मेडिसन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. आरएस नेगी ने नेपाली मूल के डंबर सिंह का इस तकनीक से सफल आपरेशन किया। नेपाल के रहने वाले डंबर सिंह अस्पताल में जनवरी माह में छाती के दर्द की समस्या को लेकर उपचार के लिए आए थे, जहां चिकित्सक उनका उपचार कर रहे थे। लेकिन डॉक्टरों को मरीज की बीमारी का सही पता नहीं चल रहा था।
विज्ञापन
ऐसे में चिकित्सकों ने थोरोस्कोपी तकनीक से आपरेशन की बात कही। इस तकनीक से अस्पताल में पहली बार मरीज का आपरेशन किया गया। आपरेशन के दौरान मरीज की छाती में छेद किया और एक स्कोप से अंदर की क्रियाओं को जांचा गया। इस दौरान पता चला कि मरीज के फेफड़ों में पानी भरा है। डॉक्टर ने मरीज की छाती से एक ऊतक निकालकर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज की लैब में भेज दिया है।
विज्ञापन
इससे कि पता चलेगा कि मरीज को कौन सी बीमारी है। मौजूदा समय में इस तरह के इलाज के लिए मरीजों को पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था। लेकिन अब आईजीएमसी अस्पताल में ही मरीजों की बीमारी का पता लगाया जा सकेगा। अब चौदह दिन बाद रिपोर्ट आने के बाद बीमारी का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकेगा।
आईजीएमसी में साल 2015 में थोरोस्कोपी मशीन आ गई थी लेकिन इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। पल्मनरी मेडिसन विभाग के डा. आरएस नेगी ने बताया कि ऑपरेशन में उनके साथ रेजिडेंट डाक्टरों का भी काफी सहयोग रहा है। वहीं चेस्ट वार्ड के बेड नंबर चार पर दाखिल डंबर सिंह ने बताया कि अब वह काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं।