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पीलिया: नगर निगम ने खुद को बताया बेकसूर, आईपीएच जिम्मेदार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 12 Mar 2016 11:15 AM IST
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नगर निगम
- फोटो : फाइल फोटो
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पीलिया मामले की जांच की आंच झेल रहे निगम ने खुद को बेकसूर साबित करने के लिए आखिरी दांव खेला है। नगर निगम ने एसआईटी को जानकारी दी है कि कसुम्पटी स्थित जिस टैंक से शहर को पानी की सप्लाई होती है वह टैंक भी आईपीएच का ही है लिहाजा जिन इलाकों में पीलिया फैला वहां पर इसी टैंक से पानी जाता रहा है उस टैंक की देख रेख आईपीएच ही करता है उसका नगर निगम से कोई लेना देना नहीं है।
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नगर निगम के इस जवाब से एसआईटी कितनी संतुष्ट दिखेगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन अपनी पूरी जिम्मेदारी दूसरे पर थोप देने से नगर निगम बच जाए, इसकी संभावना कम ही है। इन तमाम बिंदुओं पर जांच करने के लिए एसआईटी के पास दो सप्ताह से अधिक का समय है। इन मामलों में कोई निर्दोष है और कौन कसूरवार इस बारे में एसआईटी को 28 मार्च को प्रदेश उच्च न्यायालय में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
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इस मामले में वीरवार को प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में जिस तरह से नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं उस दिशा में भी एसआईटी जांच में जुट गई है। ऐसे तमाम अधिकारियों और कर्मचारियों की लिस्ट एसआईटी को तैयार करनी होगी जिनकी वजह से पीलिया फैला है और बेकसूर लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
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हाईकोर्ट के कड़े रुख एसआईटी के छूटे पसीने
इस पूरे मामले में प्रदेश उच्च न्यायालय के कड़े रुख ने एसआईटी के पसीने छुड़ा दिए हैं। वीरवार को प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि शिमला शहर की जनता को पीने योग्य पानी की सप्लाई न देने के लिए आईपीएच के साथ साथ नगर निगम की भी लापरवाही रही है। इसके लिए जिम्मेदार नगर निगम के इन तकनीकी अफसरों को क्यों गिरफ्तार नहीं किया गया?
एमसी अफसरों पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई
प्रदेश उच्च न्यायालय ने वीरवार को इस मामले में गिरफ्तार हुए एक आरोपी की जमानत याचिका पर फैसला देने के दौरान कही थी। शिमला शहर की जनता को पीने योग्य पानी देने की संवैधानिक जिम्मेदारी नगर निगम की है। लेकिन इसके लिए जिम्मेदार तकनीकी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इनकी वजह से शहर में पीलिया फैला और लोगों की जानें गई। लोग पीलिया की चपेट में आए। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ राज्य से कार्रवाई अपेक्षित थी।
कोर्ट ने कहा, पीसीबी पर भी कार्रवाई करो
कोर्ट ने आदेश में कहा है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से भी लापरवाही बरती गई इनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। ऐसा प्रतीत हो रहा कि इस मामले में आला अफसरों से नरमी बरती जा रही है और निचले अधिकारियों को ही गिरफ्तार किया जा रहा है। सभी के लिए कानून बराबर है और सभी को एक नजर से देखें।
तो क्या बच निकलेंगे एमसी और पीसीबी
इस मामले में अब तक एक आईपीएच के एसडीओ और जेई को जमानत मिल गई है। जेल में बंद बाकी आरोपियों को भी बाहर निकलने की उम्मीद जग गई है। एसआईटी ने इस मामले में आईपीएच के निचले स्तर के अधिकारियों को ही गिरफ्तार किया उसके बाद आरोपियों को हिरासत में लेने का सिलसिला रोक दिया गया। इस मामले में प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड और नगर निगम के कौन कौन अफसर जिम्मेदार रहे हैं उनके खिलाफ राज्य सरकार और एसआईटी की ओर से आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कानून के फंदे में केवल आईपीएच ही आएगा, क्या वह ही इसके लिए अकेले जिम्मेदार था। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की कोई जिम्मेदारी ही नहीं थी और इतना सब कुछ होने के बावजूद सरकार के बड़े आला अफसर क्यों आंख मूंद कर तमाशा देखते रहे। प्रदेश उच्च न्यायालय की फटकार के बाद संभव है इनकी नींद टूटे हो इस मामले में जिम्मेदार अफसरों पर ठोस कार्रवाई हो।
28 को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी एसआईटी
हालांकि इस मामले में एसआईटी की ओर से प्रदेश उच्च न्यायालय में 28 मार्च को स्ट्टेस रिपोर्ट पेश की जानी है। वीरवार को मिली लताड़ के बाद संभव है इसमें नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कुछ गिरफ्तारियां हो।