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हाईकोर्ट के नगर निगम को आदेश, एक महीने में दो किराया बढ़ोतरी रिपोर्ट

Wed, 28 Nov 2018 01:30 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 28 Nov 2018 01:30 PM IST
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Himachal pradesh high court directions to MC shimla

प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला को आदेश दिए हैं कि वह एक माह के भीतर अपनी संपत्तियों का किराया बढ़ाने को लेकर प्रस्ताव अपने सदन के पटल पर रखे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी पार्षद इस किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव में अड़ंगा डालता है तो उसे नगर निगम के हितों के विपरीत मानते हुए इसे मिस कंडक्ट समझा जाए।

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कोर्ट ने महापौर और नगर निगम आयुक्त को आदेश दिए कि वह सदन के नतीजे को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष रखे और यदि कोई पार्षद अड़ंगा डालता है तो उसका नाम भी कोर्ट को बताए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के पश्चात् यह आदेश पारित किए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पार्षदों का चयन निगम के हितों में निर्णय लेने के लिए किया गया है। यदि कोई निगम के हितों के विपरीत काम करता है तो राज्य सरकार उसके चयन को निरस्त करने के बारे में उचित कदम उठाने के लिए स्वतंत्र है।
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सरकार कार्रवाई नहीं करेगी तो कोर्ट लेगा एक्शन
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस तरह के मिस कंडक्ट पर कोई कार्यवाई नहीं करती तो कोर्ट खुद उनके खिलाफ  कानूनी कार्यवाई अमल में लाने से पीछे नहीं हटेगा। हाईकोर्ट ने नगर निगम शिमला की विभिन्न देनदारियों के सभी डिफाल्टरों के नाम कोर्ट को बताने को भी कहा है। इससे पहले कोर्ट ने निगम के आंकड़ों के अनुसार 1120 डिफाल्टरों से लगभग छह करोड़ का एरियर रिकवर करने के लिए उपयुक्त कदम उठाने के आदेश जारी किए थे। 
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ज्यादातर संपत्तियों का नहीं बढ़ा है किराया
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि निगम की अधिकांश संपत्तियां 1950 से 1960 के दशक के बीच लीज पर दी गयी थी। इनमें अधिकांश मामलों में किराया नहीं बढ़ाया गया। कोर्ट ने निगमायुक्त को अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहकर सदन की कार्यवाई का विस्तृत ब्यौरा देने के आदेश भी दिए। मामले पर सुनवाई तीन जनवरी को होगी।

कोर्ट के आदेशों की होगी अनुपालना : मेयर
मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि कोर्ट से आदेश मिले हैं जिनकी अनुपालना की जाएगी। कहा कि एक महीने के भीतर सदन बुलाकर नई दरें तय की जाएंगी। कोर्ट के आदेशों की कॉपी अभी नहीं मिली है। कॉपी मिलते ही इसका अध्ययन करेंगे और जल्द इस पर काम शुरू कर देंगे।

किराया बढ़ोतरी पर विवाद गहराया, विशेष सदन स्थगित- शहर में नगर निगम की 987 दुकानों, गोदामों और बाकी संपत्तियों का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर सियासी घमासान बढ़ गया है। इस मसले पर जहां व्यापारमंडल दोफाड़ हो गया वहीं बैठक से चंद घंटे पहले नगर निगम का विशेष सदन भी स्थगित कर दिया गया। नगर निगम ने मंगलवार दोपहर बाद साढ़े तीन बजे किराया बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विशेष सदन बुलाया था। लेकिन अचानक सुबह ही सदन स्थगित करने का फैसला ले लिया। सब इतना जल्दबाजी में हुआ कि कई पार्षदों को सदन रद्द होने की सूचना तक नहीं मिली। 

अनजान पार्षदों को इसका पता निगम कार्यालय पहुंचने पर ही चला। कई पार्षदों ने अचानक सदन स्थगित किए जाने के फैसले का कारण पूछा। मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि आयुक्त निजी कारणों से मंगलवार की बैठक के लिए उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में बैठक टालने का फैसला लिया गया। फिर बाद में बताया कि किराये के लिए जो कमेटी बनाई थी, उसने रिपोर्ट नहीं दी है, इस कारण बैठक टाली गई।

मेयर की बहानेबाजी पर बरसे नगर पार्षद- आयुक्त देर शाम तक अपने कार्यालय में ही मौजूद रहे। ऐसे में पार्षदों ने मेयर को ही निशाने पर ले लिया। इनका कहना था कि सदन की अध्यक्षता मेयर करती है। यदि आयुक्त नहीं थे तो बैठक तब भी की जा सकती थी। अब मेयर आयुक्त के न होने का बहाना बना रही है जबकि आयुक्त कार्यालय में ही मौजूद हैं। वहीं, अचानक सदन स्थगित करने के पीछे अब कई अटकलें लगाई जा रही हैं। 

कांग्रेसी पार्षद इसे सरकार के दबाव में उठाया कदम बता रहे हैं। सोमवार को शहर के कारोबारी इस मुद्दे पर स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज से भी मिले थे। मंत्री से मुलाकात के चंद घंटे बाद ही सदन स्थगित करने का फैसला लिया गया। विपक्षी पार्षद अर्चना धवन और रीता ठाकुर ने कहा कि किराया बढ़ना चाहिए।

कई दुकानों से निगम बहुत कम किराया ले रहा है, ऐसे में इनका किराया बढ़ाने का प्रस्ताव सही है। कांग्रेस पार्षद राकेश चौहान और दिवाकर शर्मा ने कहा कि सदन स्थगित करने का फैसला सही नहीं। सदन में चर्चा होनी चाहिए थी कि किराए की क्या जायज दरें होनी चाहिए।

यह है मामला
नगर निगम की शहर में 987 संपत्तियां हैं जिनका किराया वर्तमान किराये से बेहद कम है। मालरोड और लोअर बाजार में नगर निगम की कई दुकानों का किराया तीन से दस हजार रुपये प्रतिमाह है। वहीं, इन्हीं दुकानों के साथ लगती निजी दुकानों के किराये 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक हैं। निगम ने एरिया वाइज किराया वसूलने का प्रस्ताव इसलिए बनाया है ताकि जिन दुकानदारों ने अपनी दुकानें अतिक्रमण कर बढ़ा ली है उनसे एरिया वाइज किराया लिया जाए। इसी मुद्दे पर मंगलवार को स्पेशल हाउस बुलाया था।

किराया तय करने के लिए पार्षदों की कमेटी बनाई थी जिसने अभी रिपोर्ट नहीं दी है। इसी के कारण सदन स्थगित करना पड़ा है। - कुसुम सदरेट, महापौर

टाउन हाल भवन पर सियासत तेज, सीएम से फिर मिले भाजपा पार्षद-  
मालरोड स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल भवन को पाने के लिए सियासत तेज हो गई है। मेयर कुसुम सदरेट की अध्यक्षता में भाजपा पार्षद सीएम जयराम ठाकुर से मिलने प्रदेश सचिवालय पहुंचे।

पहली बार किसी मुद्दे पर 15 भाजपा पार्षद एकजुट होकर मेयर के साथ सचिवालय पहुंचे थे। यहां करीब आधे घंटे तक मुख्यमंत्री के साथ टाउन हाल के मुद्दे पर चर्चा की। पार्षदों ने कहा कि टाउनहाल नगर निगम का है और उद्घाटन के बाद एमसी को ही वापस मिलना चाहिए। कई पार्षदों ने फिर से पर्यटन विभाग के उद्घाटन कार्यक्रम पर भी सवाल उठाए। 

उन्होेंने कहा कि आखिर पर्यटन विभाग कैसे नगर निगम की संपत्ति का उद्घाटन करवा सकता है। सीएम ने पार्षदों से कहा कि अभी प्रोजेक्ट के कंट्री हेड इस कार्यक्रम में पहुंचेंगे। यह देखेंगे कि प्रोजेक्ट के लिए जो पैसा इन्होंने दिया है, वह सही इस्तेमाल हुआ है या नहीं।

कहा कि भवन पर कोई विवाद नहीं है। अभी मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में कुछ कहना सही नहीं। हालांकि, कुछ पार्षदों ने दावा किया कि सीएम ने टाउनहाल एमसी को ही वापस दिलाने का भरोसा दिया है।


शहर के जंगल वापस दे सरकार
पार्षदों ने शहर के जंगल वापस नगर निगम के हवाले करने की मांग भी की। कहा कि गिर चुके और खतरनाक पेड़ों को हटवाने के लिए नगर निगम को सरकार से मंजूरी लेनी पड़ती है। इसमें काफी समय बर्बाद हो जाता है। ऐसे में शहर के जंगल वापस एमसी को दिए जाएं ताकि इनसे जुड़े फैसले नगर निगम खुद अपने स्तर पर ले सकें। सीएम ने इस मांग पर भी जल्द चर्चा करने का भरोसा दिया।

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