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Shimla News: एमसी ने खारिज किया पानी की दरें बढ़ाने का प्रस्ताव
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महापौर ने कंपनी से पूछा, बताएं शहर में कब तक महंगा होता रहेगा पानी, अगली बैठक में दो पूरा रिकॉर्ड
वित्त संविदा समिति ने चर्चा के बाद लौटाया प्रस्ताव
पेयजल दरें दस फीसदी बढ़ाने की है तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में पीने का पानी महंगा करने के कंपनी के प्रस्ताव को नगर निगम की वित्त संविदा समिति ने खारिज कर दिया है। महापौर की अध्यक्षता वाली समिति ने यह प्रस्ताव सदन में ले जाने के बजाय वापस पेयजल कंपनी को भेज दिया है।
महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को टाउनहॉल में हुई वित्त संविदा एवं योजना समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए रखा था। कंपनी की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार शहर में पानी की दरें दस फीसदी बढ़ाने की योजना है। पिछले साल सितंबर में हुई कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी ने इसे लागू करने के लिए अब सरकार से अंतिम मंजूरी मांगी है। मंजूरी मिलने पर फरवरी से ही नई दरें लागू हो जाएंगी। हालांकि सरकार के निर्देश पर कंपनी ने इस प्रस्ताव को अब नगर निगम को भेजा है। वित्त संविदा समिति की बैठक के दौरान महापौर ने इस प्रस्ताव को लेकर फोन पर कंपनी के प्रबंध निदेशक वीरेंद्र ठाकुर से बात की। निदेशक ने कहा कि विश्व बैंक की शर्त के अनुसार दरें बढ़ाना जरूरी है। मेयर ने पूछा कि कब तक दरें बढ़ती रहेंगी, यदि दरें बढ़ती हैं तो इसकी वसूली कौन करेगा, इसकी पूरी जानकारी और विश्व बैंक की शर्ताें का पूरा ब्योरा अगली बैठक में लाया जाए। इसके बाद ही इस प्रस्ताव को सदन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सदस्य पार्षदों ने भी इसका समर्थन किया।
स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए होगा सर्वेक्षण
शिमला शहर में कुल कितनी नई लाइटों की जरूरत है, शहर के किन क्षेत्रों में लोगों की आबादी और आवाजाही ज्यादा है, इसका अब सर्वेक्षण किया जाएगा। महापौर सुरेंद्र चौहान के अनुसार शहर में कई जगह सोलर लाइटें भी लग सकती हैं। इससे बिजली का खर्च भी कम होगा। सर्वे में पता लगाया जाएगा कि शहर में ऐसे कौन कौन से क्षेत्र हैं जहां लाइटों की जरूरत है और पूरा दिन धूप रहती है। यहां सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा सकती हैं। जल्द ही इसका सर्वेक्षण शुरू होगा।
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पार्षदों को अब खुद परमिट देगा नगर निगम
शहर में प्रतिबंधित सड़क मार्गाें पर पार्षदों की गाड़ियों की आवाजाही करने के लिए नगर निगम अब इन्हें खुद परमिट देगा। अभी सरकार के निर्देश पर पार्षदों को एक साल के लिए परमिट मिलता है। इसका शुल्क जमा करना पड़ता है। हर साल इसे रिन्यू भी करना पड़ता है। वर्तमान में ज्यादातर पार्षदों के परमिट खत्म हो चुके हैं और नए परमिट की मांग कर रहे हैं। महापौर ने कहा कि इस बारे में गृह सचिव से बात की जाएगी। कहा कि पार्षद जनता के काम से नगर निगम आते हैं। इन्हें निगम अपने आधिकारिक लोगो वाला परमिट जारी करेगा ताकि इनकी पहचान हो सके। पुलिस इसे परमिट मानकर चालान न काटे, इसके लिए सरकार से बात की जाएगी।
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वित्त संविदा समिति ने चर्चा के बाद लौटाया प्रस्ताव
पेयजल दरें दस फीसदी बढ़ाने की है तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में पीने का पानी महंगा करने के कंपनी के प्रस्ताव को नगर निगम की वित्त संविदा समिति ने खारिज कर दिया है। महापौर की अध्यक्षता वाली समिति ने यह प्रस्ताव सदन में ले जाने के बजाय वापस पेयजल कंपनी को भेज दिया है।
महापौर सुरेंद्र चौहान की अध्यक्षता में शुक्रवार को टाउनहॉल में हुई वित्त संविदा एवं योजना समिति की बैठक में इस प्रस्ताव को चर्चा के लिए रखा था। कंपनी की ओर से तैयार प्रस्ताव के अनुसार शहर में पानी की दरें दस फीसदी बढ़ाने की योजना है। पिछले साल सितंबर में हुई कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी ने इसे लागू करने के लिए अब सरकार से अंतिम मंजूरी मांगी है। मंजूरी मिलने पर फरवरी से ही नई दरें लागू हो जाएंगी। हालांकि सरकार के निर्देश पर कंपनी ने इस प्रस्ताव को अब नगर निगम को भेजा है। वित्त संविदा समिति की बैठक के दौरान महापौर ने इस प्रस्ताव को लेकर फोन पर कंपनी के प्रबंध निदेशक वीरेंद्र ठाकुर से बात की। निदेशक ने कहा कि विश्व बैंक की शर्त के अनुसार दरें बढ़ाना जरूरी है। मेयर ने पूछा कि कब तक दरें बढ़ती रहेंगी, यदि दरें बढ़ती हैं तो इसकी वसूली कौन करेगा, इसकी पूरी जानकारी और विश्व बैंक की शर्ताें का पूरा ब्योरा अगली बैठक में लाया जाए। इसके बाद ही इस प्रस्ताव को सदन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सदस्य पार्षदों ने भी इसका समर्थन किया।
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स्ट्रीट लाइटें लगाने के लिए होगा सर्वेक्षण
शिमला शहर में कुल कितनी नई लाइटों की जरूरत है, शहर के किन क्षेत्रों में लोगों की आबादी और आवाजाही ज्यादा है, इसका अब सर्वेक्षण किया जाएगा। महापौर सुरेंद्र चौहान के अनुसार शहर में कई जगह सोलर लाइटें भी लग सकती हैं। इससे बिजली का खर्च भी कम होगा। सर्वे में पता लगाया जाएगा कि शहर में ऐसे कौन कौन से क्षेत्र हैं जहां लाइटों की जरूरत है और पूरा दिन धूप रहती है। यहां सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा सकती हैं। जल्द ही इसका सर्वेक्षण शुरू होगा।
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पार्षदों को अब खुद परमिट देगा नगर निगम
शहर में प्रतिबंधित सड़क मार्गाें पर पार्षदों की गाड़ियों की आवाजाही करने के लिए नगर निगम अब इन्हें खुद परमिट देगा। अभी सरकार के निर्देश पर पार्षदों को एक साल के लिए परमिट मिलता है। इसका शुल्क जमा करना पड़ता है। हर साल इसे रिन्यू भी करना पड़ता है। वर्तमान में ज्यादातर पार्षदों के परमिट खत्म हो चुके हैं और नए परमिट की मांग कर रहे हैं। महापौर ने कहा कि इस बारे में गृह सचिव से बात की जाएगी। कहा कि पार्षद जनता के काम से नगर निगम आते हैं। इन्हें निगम अपने आधिकारिक लोगो वाला परमिट जारी करेगा ताकि इनकी पहचान हो सके। पुलिस इसे परमिट मानकर चालान न काटे, इसके लिए सरकार से बात की जाएगी।