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हाईकोर्ट पहुंचा माता मृकुला देवी मंदिर की जर्जर हालात का मामला

Fri, 09 Nov 2018 01:52 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर (लाहौल-स्पीति) Updated Fri, 09 Nov 2018 01:52 PM IST
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Mata Mrukula Devi Temple threadbare situation case reached in High Court

जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति के उदयुपर स्थित माता मृकुला देवी मंदिर की जर्जर हालात और इसके पुनर्निर्माण करने को लेकर मंदिर के पुजारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।

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शासन और प्रशासन के समक्ष कई बार यह मामला उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होने पर पुजारी ने यह कदम उठाया है। मंदिर के पुजारी दुर्गादास ने कहा कि काष्टकुणी शैली में बना मृकुला देवी का मंदिर प्राचीन है।
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1972 में मंदिर में मूर्ति चोरी होने के बाद प्रदेश सरकार ने कुछ समय अपने पास रखकर इसे पुरातत्व विभाग के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद यहां दो चौकीदार तैनात रहते हैं, लेकिन अब मंदिर का निचला हिस्सा जमीन में धंस चुका है। इसे लोहे से स्पॉट देकर तिरपाल से ढका है।
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पुरातत्व विभाग मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर कोई कदम नहीं उठा रहा है। वर्ष 2016 में सांसद रामस्वरूप शर्मा ने मंदिर के दर्शन कर जर्जर हालत सुधारने को सतर लाख देने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक एक भी पैसा नहीं मिला है और न ही पुरातत्व विभाग के अधिकारी मौके पर आए। 

अंदर और बाहर काष्ठ शैली से बना है मंदिर

Mata Mrukula Devi Temple threadbare situation case reached in High Court

उन्होंने कहा कि मंदिर की महत्ता काफी है। भारत के विभिन्न हिस्सों से लोग रामायण महाभारत कालीन मंदिर के दर्शन करते आते हैं। उन्होंने आशंका जाहिर की है कि बर्फबारी या भूकंप के हल्के से झटके से मंदिर का नुकसान हो सकता है।

समय रहते यदि मंदिर की दशा सुधारी नहीं गई तो मंदिर में बनी रामायण की कलाकृतियां भी धूमिल हो जाएंगी। इसलिए मंदिर के जीर्णोद्धार के संबंध में आवश्यक कार्यवाही अमल में लाना जरूरी है।   

उदयपुर स्थित माता मृकुला मंदिर अति प्राचीन मंदिर है। मंदिर के अंदर और बाहर का निर्माण पूरी काष्ठ शैली में हुआ है। यह लाहौल-स्पीति के 14 कोठी का मंदिर है। जो द्वापर युग का बना है। मंदिर को नुकसान होने पर दुर्लभ काष्ठ शैली नष्ट हो सकती है।

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